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बिहार में खेल कोटे का फर्जीवाड़ा, पुलिस अवर निरीक्षक बना पुलिसकर्मी जिसने जेल गया था!

बिहार में खेल प्राधिकरण ने पुलिस महानिदेशक से सख्त कार्रवाई की मांग की है, क्योंकि एक पुलिसकर्मी ने अपने आपराधिक इतिहास को छिपाकर पुलिस अवर निरीक्षक की नौकरी पाई।

Jagran के अनुसार23 जुलाई 2026 को 04:10 am बजे
बिहार में खेल कोटे का फर्जीवाड़ा, पुलिस अवर निरीक्षक बना पुलिसकर्मी जिसने जेल गया था!

सौजन्य से:- Jagran

क्रिमिनल रिकॉर्ड छिपाकर दारोगा बना खिलाड़ी, बिहार में खेल कोटे पर बड़ा फर्जीवाड़ा

बिहार में "मेडल लाओ, नौकरी पाओ" योजना के तहत प्रकाश कुमार सिंह ने आपराधिक इतिहास छिपाकर पुलिस अवर निरीक्षक की नौकरी पाई। खेल प्राधिकरण ने डीजीपी से धो ...और पढ़ें

HighLights

- प्रकाश कुमार सिंह ने आपराधिक इतिहास छिपाकर नौकरी पाई।

- "मेडल लाओ, नौकरी पाओ" योजना का दुरुपयोग हुआ।

- खेल प्राधिकरण ने डीजीपी से सख्त कार्रवाई मांगी।

जागरण संवाददाता, पटना। मेडल लाओ, नौकरी पाओ (बिहार उत्कृष्ट खिलाड़ी सीधी भर्ती नियमावली, 2023) योजना का अनुचित लाभ उठाकर नौकरी हासिल करने का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है।

ड्रैगन बोट खेल में प्रकाश कुमार सिंह ने अपने ऊपर दर्ज आपराधिक मुकदमों और जेल में बिताए गए दिनों की जानकारी सरकार से छिपाकर पुलिस विभाग में अवर निरीक्षक का पद पा लिया।

मामले में बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवींद्रण शंकरण ने धोखाधड़ी का संज्ञान लेते हुए बुधवार को बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार को पत्र लिखा है। इस पत्र में आरोपित दारोगा के खिलाफ तथ्यों को छिपाने और अनुचित लाभ लेने के आरोप में सख्त कार्रवाई का आग्रह किया गया है।

आरोपित प्रकाश कुमार सिंह ने ड्रैगन बोट स्पर्धाओं में अपनी खेल उपलब्धियों के आधार पर 22 मई 2023 को जारी भर्ती विज्ञापन के तहत आवेदन किया था। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 14 दिसंबर 2023 को जारी अनुशंसा के बाद गृह विभाग के अंतर्गत उसे सब-इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया था।

वर्तमान में वह नालंदा जिले के करई परसुराय थाने में तैनात है। खेल प्राधिकरण द्वारा दस्तावेजों की स्क्रूटनी के दौरान पता चला कि आवेदन के समय प्रकाश ने अपने आपराधिक अतीत को छिपा लिया था।

जांच में पाया गया कि एक एफआईआर के मामले में वह 31 जुलाई 2022 से लेकर 14 अक्टूबर 2022 तक (कुल 75 दिन) मुजफ्फरपुर स्थित शहीद खुदीराम बोस सेंट्रल जेल में बंद था। इतने लंबे समय तक जेल में रहने जैसी बात को उसने आवेदन पत्र में जानबूझकर नहीं बताया।

निम्न वर्गीय लिपिक किया जा चुका है निलंबित

बता दें कि यह फर्जीवाड़े का दूसरा मामला है। इसके पहले नालंदा समाहरणालय में निम्न वर्गीय लिपिक (क्लर्क) पद तैनात सुधांशु कुमार को निलंबित किया गया था।

उसने वर्ष 2022 में पाटलिपुत्र खेल परिसर में संपन्न जूनियर नेशनल रग्बी चैंपियनशिप में अपना प्रतिभा दिखाया था, जबकि सुधांशु का नाम केवल कागजों में था।

असल में उसकी जगह गोल्डन कुमार नाम के खिलाड़ी ने मैदान पर मैच खेला था। इसके बाद बिहार राज्य खेल प्राधिकरण की अनुशंसा पर सुधांशु कुमार को निलंबित कर दिया गया था।

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