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क्या है राजस्थान के उस स्कूल का हाल जहाँ सीजेपी के कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट? - BBC News हिंदी

क्या है राजस्थान के उस स्कूल का हाल जहाँ सीजेपी के कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट? - Author, मोहर सिंह मीणा - पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए, रामपुरा-कंवरपुरा गांव, जयपुर से - प्रकाशित - पढ़ने का समय: 8 मिनट कॉकरोच जनता प…

BBC के अनुसार21 अगस्त 2026 को 11:55 am बजे
क्या है राजस्थान के उस स्कूल का हाल जहाँ सीजेपी के कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट? - BBC News हिंदी

सौजन्य से:- BBC

क्या है राजस्थान के उस स्कूल का हाल जहाँ सीजेपी के कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट?

- Author, मोहर सिंह मीणा

- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए, रामपुरा-कंवरपुरा गांव, जयपुर से

- प्रकाशित

- पढ़ने का समय: 8 मिनट

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कहा है कि राजस्थान के बगरू विधानसभा क्षेत्र के एक स्कूल में पहुँचे उनके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई है.

सीजेपी ने कहा है कि उनके राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ भी मारपीट की गई और लोगों ने उनपर पथराव भी किया.

बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की टीम घटना के दौरान मौक़े पर मौजूद थी.

इस दौरान सीजेपी कार्यकर्ताओं को गांव में घुसने से रोका गया, उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, पथराव कर उनकी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए. इस हमले में सीजेपी के कई कार्यकर्ता घायल हुए हें.

घटना के बाद आशुतोष रांका ने बीबीसी से बातचीत में इसे राजस्थान के 'लोकतंत्र का काला दिन' बताया है.

उन्होंने राज्य की बीजेपी सरकार पर हमला करने के आरोप लगाए हैं. बीजेपी प्रवक्ता से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया लेने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया. जैसे ही उनका पक्ष मिलेगा, उसे इस लेख में जोड़ दिया जाएगा.

वो स्कूल, जिस पर हुआ विवाद

जयपुर में राजस्थान विधानसभा से 40 किलोमीटर दूर रामपुरा-कंवरपुरा गांव में प्रवेश करते ही एक मंदिर दिखाई देता है. मंदिर के सामने दाहिनी ओर दो कमरों की एक जर्जर इमारत है, जो लंबे समय से स्कूल भवन के रूप में इस्तेमाल होती रही.

इमारत के एक तरफ़ गोबर का ढेर लगा हुआ है.

इमारत की स्थिति इतनी ख़राब है कि उसके अंदर जाना प्रतिबंधित किया हुआ है. दीवारों में दरारें हैं और खिड़कियों से अंदर देखने पर कमरों में रखा सामान और दीवारों की ख़राब हालत साफ़ पता चलती है.

इसी पुराने भवन के ठीक सामने एक कमरे में फ़िलहाल अस्थाई रूप से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है.

कमरे के एक हिस्से में भैंसों का चारा रखा हुआ है और दूसरे हिस्से में बच्चे बैठे दिखाई देते हैं. आसपास गंदगी भी नज़र आती है.

अस्थाई रूप से चल रहे इस स्कूल को एक ग्रामीण ने ही दिया है.

शिक्षा विभाग के आदेश का हवाला देते हुए स्कूल के शिक्षकों ने बीबीसी की टीम को स्कूल परिसर के अंदर प्रवेश देने से मना कर दिया.

गांव के एक बुजुर्ग ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, "स्कूल की हालत तो बहुत ख़राब है. सरकार सुनती नहीं है और लोगों को इससे मतलब नहीं है. क्योंकि बेहद ग़रीब परिवारों के कुछ बच्चे ही इसमें पढ़ते हैं."

एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने भी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर दावा किया है कि सीजेपी का विरोध कर रहे लोगों में से किसी का भी बच्चा इस स्कूल में नहीं पढ़ता है.

उन्होंने आगे कहा, "सीजेपी का विरोध कर रहे इन लोगों में से किसी का भी बच्चा इस स्कूल में नहीं पढ़ता. यह सभी भाजपा से जुड़े हुए हैं. यही कारण है कि यह नहीं चाहते कि स्कूल की हालत और यहां की व्यवस्था पर सवाल उठे."

सुबह से ही स्कूल के बाहर जमा होने लगे लोग

सीजेपी ने शुक्रवार सुबह आठ बजे रामपुरा-कंवरपुरा गांव के प्राथमिक स्कूल जाने की योजना बनाई थी और इसके बाद कार्यकर्ताओं को वाटिका इलाक़े के एक अन्य सरकारी स्कूल का भी निरीक्षण करने का निर्देश दिया था.

सुबह करीब साढ़े सात बजे से ही स्कूल के आसपास कुछ युवा जमा होने लगे थे.

इनमें से कई लोग सीजेपी के कार्यकर्ताओं के गांव में आने का विरोध कर रहे थे. जबकि, कुछ स्थानीय लोगों का कहना था कि स्कूल की ख़राब स्थिति को देखते हुए इस मुद्दे को उठाया जाना चाहिए.

एक स्थानीय युवक ने बीबीसी को बताया, "मैं भी एक समय इसी स्कूल में पढ़ा था. इसके हालात आज सबके सामने हैं. लेकिन कोई आवाज नहीं उठाता. सीजेपी ठीक कर रही है, स्कूलों के सुधार की बात होनी ही चाहिए."

सीजेपी कार्यकर्ताओं का विरोध

क़रीब नौ बजे तक स्कूल की जर्जर इमारत के बाहर लोग सीजेपी के विरोध में नारेबाजी करते हुए जमा हो गए.

इन्हीं में लालचंद शर्मा भी थे जो खुद को पूर्व पार्षद बताते हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "हम राष्ट्रीय हिंदूवादी हैं. सीजेपी को गांव में नहीं घुसने देंगे. यह स्कूल के नाम पर यहां राजनीति करना चाहती है और देश का बंटवारा करना चाहती है."

सीजेपी का विरोध कर रहे लोगों ने उनकी गाड़ियों को वापस ले जाने को कहा. इसके बाद सीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें गांव से बाहर भेज दिया गया.

विरोध में शामिल एक अन्य युवक ने अपना नाम न ज़ाहिर करते हुए बीबीसी से कहा, "गांव की मुख्य सड़कें ख़राब हैं, स्कूल की हालत देखो, लेकिन आज यह लोग अपना प्रचार करने आ रहे हैं. इससे पहले कोई नहीं आया."

युवक ने कहा, "हम राम के थे और राम के ही रहेंगे. हमारे यहां न तो कोई दूसरा आया था और न ही आएगा."

गांव से लौटाए गए सीजेपी कार्यकर्ता करीब तीन किलोमीटर दूर जयपुर-कोटा हाईवे पर पहुंचे, जहां पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे.

उन्होंने कहा, "यह बीजेपी के बाहर से बुलाए गए गुंडे हैं. कितने शर्म की बात है कि बीजेपी को भैंसों के तबेले में स्कूल चलाना मंज़ूर है. लेकिन जो लोग स्कूल को ठीक कराने की बात कर रहे हैं उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया जा रहा है."

सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका के आरोपों पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राम लाल शर्मा से कई बार फ़ोन से संपर्क करने का प्रयास किया गया है. लेकिन, ख़बर लिखे जाने तक उनसे संपर्क नहीं हो सका है. उनकी प्रतिक्रिया मिलने पर छापी जाएगी.

गांव में प्रवेश के दौरान हुए सामने-सामने

जैसे ही सीजेपी के कार्यकर्ता गांव में प्रवेश करने लगे. सामने से विरोध कर रहे लोग नारेबाजी करते हुए उनकी ओर बढ़े. दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए. अचानक ही हालात तनावपूर्ण हो गए, कुछ लोगों ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलते हुए एकाएक पीटना शुरू कर दिया.

इसके बाद गाली-गलौज हुई और कार्यकर्ताओं पर पथराव शुरू कर दिया गया, जिससे कई कार्यकर्ता घायल हुए और उनकी गाड़ियों के शीशे टूट गए.

मारपीट के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने पास ही स्थित एक निर्माणाधीन अपार्टमेंट में छिपकर खुद को बचाया.

घायल सीजेपी कार्यकर्ता सलमान एक पैर में जूता नहीं था, पूरे कपड़े मिट्टी से सने थे. उनरे शरीर पर कई जगह चोट के निशान दिखाई दे रहे थे.

इंजीनियरिंग कर रहे सलमान बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "हम सिर्फ़ स्कूल का निरीक्षण करने जा रहे थे. हम गांव के अंदर तक भी नहीं पहुंचे थे कि हमें पीटना शुरू कर दिया. हमें पाकिस्तानी कहने लगे, हमारी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए. भला कोई ऐसा कैसे कर सकता है."

सीजेपी से जुड़ी रेखा शर्मा ने कहा कि उनका फ़ोन तोड़ दिया गया और उनके साथ भी बदसलूकी की गई.

उन्होंने कहा, "जैसे ही हम आगे बढ़े हम पर हमला कर दिया गया. हमारे कई साथी घायल हुए हैं, मेरा फ़ोन तोड़ दिया. हम दो महिलाओं के साथ भी बदसलूकी की गई. हमारे ऊपर मिट्टी फेंकी गई और हमें पाकिस्तानी कहते हुए नारेबाजी की गई. हमारी कुछ गाड़ियां आगे खड़ी हैं. लेकिन हम यदि गाड़ी लेने गए तो हमें डर है कि वे फिर हमला कर देंगे."

अभिजीत दीपके- 'आशुतोष रांका को काफ़ी पीटा है'

अभिजीत दीपके ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, "आज आशुतोष पर जो हमला हुआ है वह बीजेपी वालों का डर दिखाता है. उन्हें डर है कि सीजेपी वालों के डर से सच में स्कूल न ठीक हो जाएं, क्योंकि लोग पढ़ लिख जाएंगे तो बीजेपी वालों को वोट नहीं देंगे."

उन्होंने कहा, "जब एक भैंस से तबेले में सरकारी स्कूल चल रहा था. आशुतोष वहां जाने वाले थे तो और यह दिखाने वाले थे कैसे भैंस के तबेले में ग़रीबों के बच्चों को बैठाया गया था."

"इसी के डर से बीजेपी के लोगों ने आशुतोष पर हमला किया. उन पर पत्थरबाज़ी की, एक कार्यकर्ता का हाथ भी टूट गया. आशुतोष को काफ़ी ज़्यादा पीटा है."

आशुतोष रांका ने बीजेपी और राजस्थान सरकार को घेरते हुए पूरी घटना के पीछे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को ज़िम्मेदार बताया है.

उन्होंने कहा, "यह सब मदन दिलावर के कहने पर हुआ है. डेढ़ साल से स्कूल भैंसों के तबेले में चल रहा है. हमारे ऊपर पथराव किया, गाड़ियों के शीशे तोड़े गए हैं. मेरी शर्ट फाड़ी गई है, महिलाओं के साथ अभद्रता हुई है. हमारे एक वॉलंटियर का हाथ टूट गया है, उसे अस्पताल लेकर जा रहे हैं."

आशुतोष ने कहा, "पुलिस पूरी तरह ग़ायब थी. आज राजस्थान के लोकतंत्र में काला दिन है."

हमलावरों की गिरफ़्तारी और स्कूलों में कैमरे और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक के आदेश को वापस लेने को लेकर उन्होंने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया.

उन्होंने कहा, "वरना अब यह आंदोलन स्कूलों से बढ़कर मदन दिलावर के इस्तीफ़े तक जाएगा."

राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने आशुतोष रांका के आरोपों पर फ़िलहाल कुछ नहीं कहा है.

हालांकि उन्होंने एक बयान जारी कर कहा, "विद्यालयों को राजनीति का अखाड़ा न बनाएं! जानकारी में आया है कि कुछ कथित राजनीतिक दलों से जुड़े लोग विद्यालयों में जाकर अनावश्यक रूप से माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है."

उन्होंने कहा, "विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण का पवित्र परिसर है. यहाँ राजनीति नहीं, शिक्षा, संस्कार और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य पर ध्यान होना चाहिए."

कांग्रेस ने क्या कहा

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह ने भी बीजेपी को इस घटनाक्रम के लिए ज़िम्मेदार बताते हुए आरोप लगाया, "विरोध करने वाले लोग ग्रामीण नहीं, बल्कि भाजपा के कार्यकर्ता थे."

उन्होंने कहा, "बीजेपी कार्यकर्ता जनहित से जुड़े हर काम का विरोध करेंगे. वे सिर्फ ऊपर से मिले आदेशों का पालन करेंगे. अगर किसी को स्कूल जाने से रोका जाता है या उस पर हमला किया जाता है तो हम इसकी निंदा करते हैं."

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, "हम इसकी निंदा करते हैं, यह हिंसा नहीं होनी चाहिए. स्कूलों की स्थिति बाहर आनी चाहिए. स्कूलों की हालत ख़राब है यह लोग उन्हें छिपाना चाहते हैं लेकिन छिपा नहीं पाएंगे."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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