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राजस्थान में अब हाईटेक होगी बीट पुलिसिंग, AI की मदद से मजबूत होगा सिस्टम

राजस्थान में अब हाईटेक होगी बीट पुलिसिंग, AI की मदद से मजबूत होगा सिस्टम डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से बीट पुलिसिंग में धरातल पर बेहतर परिणाम दिखाई देंगे. राजस्थान में अब बीट पुलिसिंग का तरीका ब…

ABP News के अनुसार5 अक्टूबर 2026 को 04:04 pm बजे
राजस्थान में अब हाईटेक होगी बीट पुलिसिंग, AI की मदद से मजबूत होगा सिस्टम

सौजन्य से:- ABP News

राजस्थान में अब हाईटेक होगी बीट पुलिसिंग, AI की मदद से मजबूत होगा सिस्टम

डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से बीट पुलिसिंग में धरातल पर बेहतर परिणाम दिखाई देंगे.

राजस्थान में अब बीट पुलिसिंग का तरीका बदलने जा रहा है. पुलिस और आमजन के बीच सीधे संपर्क की सबसे अहम कड़ी मानी जाने वाली बीट पुलिसिंग को तकनीक से जोड़ा जाएगा. इसके लिए राजस्थान पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) के बीच आज जयपुर में एमओयू साइन हुआ. नई व्यवस्था की शुरुआत पहले चरण में 9 जिलों से की गई है. इसके अनुभव के आधार पर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा.

पुलिस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम में राजस्थान पुलिस के डीजीपी राजीव कुमार शर्मा और BPR&D के महानिदेशक आलोक मित्तल की मौजूदगी में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए. BPR&D इस पूरी पहल में विशेषज्ञ सलाह, प्रशिक्षण सामग्री, मॉडल प्रारूप और समीक्षा का ढांचा उपलब्ध कराएगा, जबकि मैदानी स्तर पर इसे लागू करने की जिम्मेदारी राजस्थान पुलिस की होगी.

हर रेंज से एक-एक जिले का चयन

पहले चरण में हर रेंज से एक-एक जिले का चयन किया गया है. इनमें सीकर, जयपुर उत्तर, धौलपुर, डीडवाना-कुचामन, कोटा शहर, डूंगरपुर, चूरू, जैसलमेर और जोधपुर पश्चिम शामिल हैं. यहां बीट की सीमाएं और व्यवस्था आबादी, अपराध की स्थिति, भौगोलिक परिस्थितियों और शहरी-ग्रामीण क्षेत्र के हिसाब से तय की जाएगी.

बीट स्तर पर अपराध के हॉटस्पॉट, संवेदनशील जगहों और महत्वपूर्ण संस्थानों की पहचान कर जियो-मैप्ड बीट प्रोफाइल तैयार की जाएगी. स्थानीय अपराध और जरूरी सूचनाओं का रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से मजबूत किया जाएगा.

इन तकनीकों का होगा इस्तेमाल

नई व्यवस्था में राजकॉप ई-बीट बुक को और मजबूत किया जाएगा. GPS, जियो-टैगिंग, QR आधारित सुविधाएं, डिजिटल दस्तावेज और डैशबोर्ड जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे बीट पुलिसकर्मियों की गतिविधियों और स्थानीय सूचनाओं की निगरानी आसान होगी.

आमजन के बीच बढ़ेगा संपर्क

पुलिस मित्र, कम्युनिटी लाइजन ग्रुप और 'नो योर बीट ऑफिसर' जैसी पहल के जरिए पुलिस और आमजन के बीच संपर्क बढ़ाया जाएगा. विद्यार्थियों, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों के साथ भी नियमित संवाद पर जोर रहेगा. बीट पुलिसिंग की समीक्षा KPI यानी तय प्रदर्शन मानकों के आधार पर होगी.

बीट पुलिसिंग में बेहतर होंगे परिणाम- DGP

डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से बीट पुलिसिंग में धरातल पर बेहतर परिणाम दिखाई देंगे. वहीं BPR&D महानिदेशक आलोक मित्तल ने कहा कि पुलिसिंग में बीट ही बेसिक है और इस पहल से राज्यों की अच्छी व्यवस्थाओं को साझा करने का मौका मिलेगा.

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