आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस ने पेटेंटिंग, मूर्तिकला और अप्लाइड आर्ट की शिक्षा में कदम रखा है: राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स
राजस्थान के सबसे पुराने और राज्य के एकमात्र सरकारी फाइन आर्ट्स कॉलेज राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग शिक्षा में किया जाता है। यहां छात्रों को थ्योरी के साथ-साथ स्टूडियो और वर्कशॉप में प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया जाता है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
फाइन आर्ट सीखाने वाला राजस्थान का एक मात्र सरकारी कॉलेज, जहां युवा कलाकारों को नई उड़ान दे रहा AI
परंपरागत चित्रकला, मूर्तिकला और अप्लाइड आर्ट की शिक्षा के बीच अब एआई भी अपनी जगह बना रहा है. अंकुर जाकड़ की रिपोर्ट...
Published : July 22, 2026 at 11:13 AM IST
जयपुर : क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले समय में कलाकारों की जगह ले लेगा या फिर ये उनकी कल्पनाओं को नया विस्तार देने वाला सबसे बड़ा माध्यम साबित होगा? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए ईटीवी भारत पहुंचा राजस्थान के सबसे पुराने और राज्य के एकमात्र सरकारी फाइन आर्ट्स कॉलेज 'राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स'. यहां परंपरागत चित्रकला, मूर्तिकला और अप्लाइड आर्ट की शिक्षा के बीच अब एआई भी अपनी जगह बना रहा है. यहां एआई कलाकार का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी रचनात्मक सोच को नई दिशा देने वाला सहयोगी बन रहा है.
1857 से कला की विरासत संभाल रहा : राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स केवल एक कॉलेज नहीं, बल्कि प्रदेश की कला परंपरा का जीवंत इतिहास है. इसकी स्थापना वर्ष 1857 में जयपुर रियासत के तत्कालीन शासक महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने 'मदरसा-ए-हुनरी' के रूप में की थी. वर्ष 1886 में इसका नाम 'महाराजा कला विद्यालय' रखा गया और आज ये शिक्षा संकुल परिसर में राजस्थान सरकार के एकमात्र सरकारी फाइन आर्ट्स कॉलेज के रूप में संचालित हो रहा है. यहां हर वर्ष केवल 72 छात्रों को प्रवेश मिलता है, जबकि आवेदन करने वालों की संख्या कई गुना ज्यादा रहती है.
पढ़ें. मोबाइल से दूर, कलाइयों और धागों के सहारे कठपुतलियों को जीवंत बनाने का अभ्यास कर रहे बच्चे
तीन कोर्स, लेकिन सबसे ज्यादा क्रेज पेंटिंग का : महाविद्यालय में चित्रकला, मूर्तिकला और अप्लाइड आर्ट (व्यावहारिक कला) की पढ़ाई कराई जाती है. तीनों विषयों में 24-24 सीटें निर्धारित हैं. इस बार पेंटिंग के लिए सबसे ज्यादा 138 आवेदन आए, जबकि अप्लाइड आर्ट के लिए 68 और स्कल्पचर के लिए 31 आवेदन प्राप्त हुए. इसके बावजूद मूर्तिकला की तीन सीटें अभी भी खाली हैं, जिन पर ऑफलाइन प्रवेश दिए जाएंगे. प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार खंडेलवाल बताते हैं कि छात्रों का रुझान स्वाभाविक रूप से पेंटिंग की ओर ज्यादा रहता है, जबकि मूर्तिकला में वही छात्र ज्यादा आते हैं, जिनका पारिवारिक जुड़ाव पहले से इस कला से रहा हो. ऑनलाइन एडमिशन शुरू होने के बाद पूरे देश में कॉलेज की जानकारी पहुंची है और अब मूर्तिकला में भी पहले की तुलना में अधिक छात्र रुचि दिखा रहे हैं.
थ्योरी के साथ हाथों से सीखने पर सबसे ज्यादा जोर : फाइन आर्ट्स केवल किताबों का विषय नहीं है. यहां छात्रों को थ्योरी के साथ-साथ स्टूडियो और वर्कशॉप में प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया जाता है. पेंटिंग, स्केचिंग, मूर्ति निर्माण, क्ले मॉडलिंग, स्कल्पचर और डिजाइनिंग जैसी विधाओं में छात्र लगातार अभ्यास करते हैं. प्रोफेसर खंडेलवाल ने बताया कि कॉलेज से निकले कई कलाकार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं. कॉलेज समय-समय पर इन वरिष्ठ कलाकारों को बुलाकर छात्रों के साथ उनके अनुभव भी साझा करवाता है.
एआई बना नया साथी, लेकिन कलाकार का विकल्प नहीं : तकनीक ने कला की दुनिया में भी अपनी दस्तक दे दी है. अब विद्यार्थी एआई टूल्स की मदद से अपनी कल्पना को अलग-अलग रूपों में देखने लगे हैं. किसी विषय पर रंगों का संयोजन कैसा हो, किसी विचार को किस शैली में प्रस्तुत किया जा सकता है या किसी डिजाइन को और प्रभावशाली कैसे बनाया जाए, एआई इन सभी संभावनाओं के विकल्प उपलब्ध करा रहा है. प्राचार्य प्रो. अनिल खंडेलवाल का कहना है कि एआई छात्रों के मौलिक विचारों को दिशा देने में मदद करता है. ये नई संभावनाएं दिखाता है, लेकिन अंतिम रचना कलाकार के हाथों से ही जन्म लेती है. कला में संवेदनशीलता, अनुभव और कल्पनाशक्ति का कोई विकल्प नहीं हो सकता.
दुनिया की कला अब एक क्लिक पर : एआई ने दुनिया भर की कला छात्रों के सामने खोल दी है. पहले विदेशों की प्रदर्शनियों, डिजाइन ट्रेंड्स और नई कला शैलियों तक पहुंच आसान नहीं थी, लेकिन अब न्यूयॉर्क, मिलान या पेरिस में क्या नया हो रहा है, इसकी जानकारी कुछ ही मिनटों में मिल जाती है. इससे छात्र वैश्विक ट्रेंड समझकर अपनी कला को और समृद्ध बना सकते हैं. किसी कलाकार की मौलिक पहचान उसके अपने विचारों और उसकी शैली से ही बनती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि चाहे तकनीक कितनी भी विकसित हो जाए, हाथ से बनी पेंटिंग और मूर्तियों की अपनी अलग पहचान रहेगी. विश्वभर की आर्ट गैलरियों और प्रदर्शनियों में आज भी ओरिजिनल कलाकृतियों की सबसे ज्यादा मांग है.
पढ़ें. डॉक्टर या कलाकारः दिनभर मरीजों का इलाज शाम को करते हैं स्मोक पेंटिंग्स...ऐसे आया आइडिया
रोजगार की संभावनाएं : होटल इंडस्ट्री, इंटीरियर डिजाइन, म्यूजियम, गैलरी और प्राइवेट स्टूडियो में प्रशिक्षित कलाकारों के लिए लगातार अवसर उपलब्ध हैं. स्कल्पचर और पेंटिंग दोनों क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं. कई कलाकार अपना स्टूडियो संचालित कर रहे हैं, जबकि कई शिक्षण संस्थानों और डिजाइन उद्योग में भी कार्यरत हैं. कॉलेज के छात्र आर्यन तिवाड़ी ने बताया कि डिजिटल दुनिया अपनी जगह है, लेकिन कलाकार अपनी सोच और भावनाओं को हाथों से ही सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकता है. भविष्य में वो शिक्षक बनने के साथ-साथ म्यूजियम और स्टूडियो आधारित कार्यों में भी अवसर तलाशना चाहते हैं. वहीं, छात्रा कशिश का कहना है कि जयपुर कला का बड़ा केंद्र है और यहां कला सीखने के बाद लगातार नई चीजें समझने और प्रयोग करने का अवसर मिलता है. समाज की सोच अलग-अलग हो सकती है, लेकिन कला का महत्व कभी कम नहीं होगा. वो भविष्य में प्रोफेशनल पेंटर और आर्ट टीचर बनने का सपना देख रही हैं.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने कला जगत को नए विकल्प जरूर दिए हैं, लेकिन कला की आत्मा आज भी कलाकार की कल्पना और हाथों के हुनर में बसती है. एआई विचारों को दिशा दे सकता है, नए प्रयोग सुझा सकता है और दुनिया भर की कला से परिचित करा सकता है, लेकिन कैनवास पर रंगों में जान फूंकने का काम आज भी कलाकार ही करता है. राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स की परंपरा और आधुनिक तकनीक का ये संगम आने वाले समय में कला शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है.
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

Jodhpur AIIMS : रेजिडेंट डॉक्टर का आरोप- रैगिंग की शिकायत करने पर तीन बार किया फेल, केंद्रीय मंत्री से न्याय की अपील

मानव मस्तिष्क के रहस्यों को समझने के लिए IIT जोधपुर की दूरगामी शोध

जोजरी-नदी-मामला: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य-सचिव को ठहराया जिम्मेदार: अगली सुनवाई में होंगे पेश, हाई लेवल कमेटी बोली- प्रदूषित पानी से कम हुए वन्यजीव - Jodhpur News


