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एक कॉल और यूं बिछ जाता था ठगी का जाल; राजस्थान पुलिस ने दिल्ली से 83 को दबोचा

एक कॉल और यूं बिछ जाता था ठगी का जाल; राजस्थान पुलिस ने दिल्ली से 83 को दबोचा पूछताछ में कार्यालय की संचालिका सलोनी मित्तल (47) का नाम सामने आया है। पुलिस की जांच में पता चला कि फर्जी बैंक आईडी के जरिए ग्राहकों को कॉल कि…

Hindustan के अनुसार31 अगस्त 2026 को 09:32 am बजे
एक कॉल और यूं बिछ जाता था ठगी का जाल; राजस्थान पुलिस ने दिल्ली से 83 को दबोचा

सौजन्य से:- Hindustan

एक कॉल और यूं बिछ जाता था ठगी का जाल; राजस्थान पुलिस ने दिल्ली से 83 को दबोचा

पूछताछ में कार्यालय की संचालिका सलोनी मित्तल (47) का नाम सामने आया है। पुलिस की जांच में पता चला कि फर्जी बैंक आईडी के जरिए ग्राहकों को कॉल किए जाते थे और क्रेडिट कार्ड सेवाओं के नाम पर उन्हें अपने जाल में फंसाने का आरोप है।

डीग पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर में चल रहे एक कथित फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। राजस्थान पुलिस ने दिल्ली पुलिस की मदद से तीन मंजिला इमारत में संचालित आनंद एंटरप्राइजेस कार्यालय पर छापा मारकर 43 युवतियों समेत कुल 83 लोगों को हिरासत में लिया है। आरोप है कि यहां प्राइवेट बैंक के क्रेडिट कार्ड के नाम पर लोगों से संपर्क कर ऑनलाइन ठगी की जाती थी। पुलिस को कार्रवाई के दौरान एक्सिस बैंक के फर्जी विजिटिंग कार्ड और आईडी कार्ड भी मिले हैं।

डीग एसपी कांबले शरण गोपीनाथ ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों में कर्मचारी और ट्रेनिंग स्टाफ शामिल हैं। सभी को राजस्थान लाकर कामां थाने में रखा गया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का संचालन कैसे किया जा रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

एक्सिस बैंक मैनेजर की शिकायत से खुला मामला

मामले की शुरुआत 20 अगस्त को हुई, जब एक्सिस बैंक की डीग शाखा के प्रबंधक फूल सिंह ने डीग साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि कुछ लोग एक्सिस बैंक के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी आईडी और विजिटिंग कार्ड के जरिए लोगों से क्रेडिट कार्ड के लिए संपर्क कर रहे हैं।

शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी जानकारी जुटाकर संदिग्धों की पहचान शुरू की। जांच के दौरान आजमगढ़ निवासी आकाश राठौर का नाम सामने आया। आरोप है कि आकाश ने एक ग्राहक को एक्सिस बैंक का क्रेडिट कार्ड दिलाने का झांसा दिया था।

जब ग्राहक ने उससे बैंक से संबंध और पहचान के बारे में जानकारी मांगी तो उसने वाट्सएप के जरिए एक्सिस बैंक का विजिटिंग कार्ड और आईडी कार्ड भेजा। दस्तावेज देखने के बाद ग्राहक को शक हुआ। उसने दोनों दस्तावेज अपने परिचित बैंक कर्मचारी को दिखाए।

बैंक कर्मचारी ने एक्सिस बैंक की विजिलेंस टीम से दस्तावेजों की जांच कराई। जांच में विजिटिंग कार्ड और आईडी कार्ड फर्जी पाए गए। इसके बाद डीग साइबर थाने में मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।

आकाश की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली तक पहुंची पुलिस

पुलिस ने आकाश राठौर को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया। पूछताछ के दौरान पुलिस को दिल्ली में चल रहे एक बड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद डीग पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची।

उप-पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र पाल के नेतृत्व में साइबर थाना डीग की टीम ने उत्तम नगर थाना पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद दिल्ली पुलिस के साइबर द्वारका और उत्तम नगर थाना पुलिस की तकनीकी और जमीनी सहायता ली गई।

पुलिस टीम ने उत्तम नगर स्थित तीन मंजिला इमारत में संचालित आनंद एंटरप्राइजेस कार्यालय पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी और ट्रेनिंग स्टाफ मौजूद मिला।

तीन मंजिला कार्यालय में चल रहा था कॉलिंग और ट्रेनिंग का काम

पुलिस के मुताबिक कार्यालय में कर्मचारियों को कॉलिंग और ट्रेनिंग से जुड़ा काम कराया जा रहा था। छापे के दौरान कुल 83 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें 43 युवतियां भी शामिल हैं।

राजस्थान पुलिस सभी को आगे की कानूनी कार्रवाई और पूछताछ के लिए डीग लेकर आई है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के एक ही कार्यालय से जुड़े होने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यहां किस तरह का काम कराया जा रहा था और कर्मचारियों को क्या जिम्मेदारी दी गई थी।

संचालिका से पूछताछ में सामने आईं अहम कड़ियां

प्रारंभिक पूछताछ में कार्यालय की संचालिका सलोनी मित्तल (47) का नाम सामने आया है। पुलिस की जांच में पता चला कि फर्जी बैंक आईडी के जरिए ग्राहकों को कॉल किए जाते थे और क्रेडिट कार्ड सेवाओं के नाम पर उन्हें अपने जाल में फंसाने का आरोप है।

हालांकि पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि एक्सिस बैंक के फर्जी आईडी कार्ड और विजिटिंग कार्ड किसने तैयार किए थे। इनके इस्तेमाल के पीछे मुख्य उद्देश्य क्या था, इसकी भी जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या ग्राहकों की जानकारी जुटाने के लिए बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या अन्य माध्यमों से डेटा लिया जा रहा था।

सिम कार्ड भी जांच के दायरे में

जांच के दौरान कॉलिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सिम कार्ड की जानकारी भी पुलिस को मिली है। प्रारंभिक जांच में ये सिम कार्ड संबंधित कॉलर्स के नाम पर ही पाए गए हैं। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में सिम कार्ड फर्जी नहीं मिले हैं।

अब पुलिस इन नंबरों की कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

83 लोगों से पूछताछ, नेटवर्क की पड़ताल जारी

डीग पुलिस फिलहाल हिरासत में लिए गए सभी 83 लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कॉल सेंटर का संचालन कौन कर रहा था, फर्जी दस्तावेज कहां से तैयार किए गए और ठगी से जुड़े पैसों का लेनदेन किस तरह होता था।

इसके साथ ही जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क के तार दिल्ली और राजस्थान में सामने आए अन्य साइबर ठगी के मामलों से जुड़े हैं या नहीं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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