8वीं पास कैदी की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में लिखी 'जेल में ब्रांडेड कफन' किताब पर बवाल, किए कई चौकाने वाले खुलासे
8वीं पास कैदी की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में लिखी 'जेल में ब्रांडेड कफन' किताब पर बवाल, किए कई चौकाने वाले खुलासे कैदी योगेश चारणवासी की किताब 'जेल में ब्रांडेड कफन' ने सुरक्षा व्यवस्था और लॉरेंस बिश्नोई के वीआईपी रुतबे…

सौजन्य से:- ETV Bharat
8वीं पास कैदी की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में लिखी 'जेल में ब्रांडेड कफन' किताब पर बवाल, किए कई चौकाने वाले खुलासे
कैदी योगेश चारणवासी की किताब 'जेल में ब्रांडेड कफन' ने सुरक्षा व्यवस्था और लॉरेंस बिश्नोई के वीआईपी रुतबे का सनसनीखेज खुलासा किया है.
Published : August 25, 2026 at 2:50 PM IST
अजमेर: अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद एक कैदी की ऑनलाइन किताब ने राजस्थान पुलिस और जेल प्रशासन की नींद उड़ा दी है. 8वीं पास कैदी योगेश चारणवासी की किताब 'जेल में ब्रांडेड कफन' में दावा किया गया है कि देश के सबसे खूंखार गैंगस्टर न सिर्फ जेल के भीतर मोबाइल और ब्रांडेड कपड़ों के साथ ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जी रहे हैं, बल्कि अंदर बैठकर ही मर्डर जैसे बड़े अपराधों का नेटवर्क भी चला रहे हैं.
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल एक बार फिर से चर्चा में है. जेल में कैद एक हार्डकोर अपराधी और झुंझुनू जिले के मलसीसर निवासी योगेश चारणवासी ने जेल में 'जेल में ब्रांडेड कफन' किताब लिखी है. कैदी योगेश चारणवासी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई जिलों की जेलों में भी कैद रहा है. खास बात यह है कि आठवीं पास योगेश चारणवासी ने हाई सिक्योरिटी जेल में यह किताब लिखी है, जो ऑनलाइन उपलब्ध भी है. योगेश चारणवासी ने जेल में बड़े गैंगस्टरों के रुतबे और प्रभाव का खुलासा कर जेलों की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. योगेश चारणवासी के खिलाफ हरियाणा और राजस्थान में 15 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं. इनमें लूट, आर्म्स एक्ट और धोखाधड़ी के मामले हैं. वह वर्ष 2020 से अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में कैद है. वर्ष 2008 से उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा था. जनवरी 2026 में उसकी किताब 'जेल में ब्रांडेड कफन' ऑनलाइन प्रकाशित हुई थी.
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के अधीक्षक पारसमल जांगिड़ का कहना है कि कैदी योगेश चारणवासी से इस किताब के बारे में पूछताछ की जा रही है. जेल नियमों के अनुसार कैदी कैंटीन से नोटपैड और पेन ले सकते हैं. यह किताब कब पब्लिश हुई, इसके बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा रही है.
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गैंगस्टरों को मिलती हैं अलग से सुविधाएं: योगेश चारणवासी ने 'जेल में ब्रांडेड कफन' किताब में लिखा है कि जेल में गैंगस्टरों का रुतबा रहता है और उन्हें मनचाही सुविधाएं मिलती हैं. मसलन वे ब्रांडेड कपड़े और जूते भी जेल में मंगवा लेते हैं. वे जेल के भीतर रहकर बाहर के आपराधिक नेटवर्क से जुड़े रहते हैं और जेल में रहकर ही किसी की भी हत्या तक करवा देते हैं.
जेल में ब्रांडेड कपड़े और जूते भी रुतबे का हिस्सा: किताब में ऐसे कई चौंकाने वाले तथ्य भी लिखे हुए हैं कि हाई सिक्योरिटी जेल से पेशी पर कोर्ट में जब किसी गैंगस्टर को ले जाया जाता है, तो वह ब्रांडेड कपड़े और जूते पहनकर जाता है, साथ ही सिर पर टोपी लगाता है. इससे वह जेल के अंदर के साथ-साथ बाहर भी अपना रुतबा दिखाता है कि सब ठीक-ठाक है. उसने अपनी किताब में लिखा है कि लॉरेंस बिश्नोई ने जमानत पर छूट रहे अपने भाई अनमोल और साथी रोहित गोदारा व सचिन थापन को जेल में ही बता दिया था कि उन्हें बाहर जाकर क्या करना है. इन तीनों ने बाहर जाकर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड को अंजाम दिया. इसके बाद रोहित गोदारा विदेश जाकर छिप गया.
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कैदियों ने की थी 20 दिन की भूख हड़ताल: 'जेल में ब्रांडेड कफन' किताब के लेखक कैदी योगेश चारणवासी ने लिखा है कि वर्ष 2021 में जब हाई सिक्योरिटी जेल में जेल अधीक्षक प्रीति चौधरी थीं, तब गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई हाई सिक्योरिटी जेल के वार्ड नंबर तीन में बंद था. जेल में अन्य कैदियों की तुलना में उसकी विशेष व्यवस्था थी. उसकी सुरक्षा के लिए 10 से 12 जेल प्रहरी लगाए गए थे. उस दौरान कुख्यात अपराधी पपला गुर्जर भी उसी वार्ड में था. उस वक्त हाई सिक्योरिटी जेल में लॉरेंस बिश्नोई और पपला गुर्जर के अलावा जीतू बन्ना, दीपक पहल, सुरा जागसी, सचिन थापन, अनमोल, देवेंद्र पाल, रोहित गोदारा और वह खुद भी बंद था. लॉरेंस को उसके भाई अनमोल से नहीं मिलने दिया जा रहा था, तब कैदी मांगीलाल नौखड़ा के कहने पर जेल में भूख हड़ताल की गई जो 20 दिन तक चली थी. जेल प्रशासन ने 21वें दिन मांगें मान लीं और अनमोल, रोहित और सचिन थापन को लॉरेंस के साथ एक ही वार्ड में शिफ्ट कर दिया.
गैंगस्टरों के दबाव और प्रभाव में रहते हैं कई जेल प्रहरी: किताब के लेखक कैदी योगेश चारणवासी ने लिखा है कि हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर कैदी जेल प्रहरियों को पैसा देकर मोबाइल फोन और सिम मंगवा लिया करते थे. उस फोन के जरिए वे अपने आपराधिक नेटवर्क से जुड़े रहते थे. फोन के जरिए वे अपने परिचितों, रिश्तेदारों और अपनी गर्लफ्रेंड से भी बातचीत करते थे. कैदी चारणवासी ने यह भी किताब में लिखा है कि सभी जेल प्रहरी एक जैसे नहीं होते, कुछ बदमाशों के दबाव और प्रभाव में भी रहते हैं. उसने यह भी लिखा कि कई जेल प्रहरी और जेल अधिकारी हाई सिक्योरिटी जेल में ड्यूटी लगवाने से भी डरते हैं.
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