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राजस्थान सरकार स्कूलों के निरीक्षण से ‘बाहरी लोगों’ को रोक रही, आंकड़े बताते हैं 69% में बड़े सुधार की जरूरत

नई दिल्ली: शुक्रवार (21 अगस्त) को कथित तौर पर कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) के एक प्रतिनिधिमंडल पर हमला किया गया. यह प्रतिनिधिमंडल जयपुर जिले के बगरू स्थित रामपुरा कंवरपुरा गांव में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचा…

The Wire - Hindi के अनुसार23 अगस्त 2026 को 02:56 pm बजे
राजस्थान सरकार स्कूलों के निरीक्षण से ‘बाहरी लोगों’ को रोक रही, आंकड़े बताते हैं 69% में बड़े सुधार की जरूरत

सौजन्य से:- The Wire - Hindi

नई दिल्ली: शुक्रवार (21 अगस्त) को कथित तौर पर कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) के एक प्रतिनिधिमंडल पर हमला किया गया. यह प्रतिनिधिमंडल जयपुर जिले के बगरू स्थित रामपुरा कंवरपुरा गांव में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचा था. बताया गया है कि स्कूल की इमारत जर्जर हालत में है.

सीजेपी ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अपने प्रतिनिधिमंडल पर हमला करने के लिए ‘गुंडे’ भेजने का आरोप लगाया. इसके जवाब में राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि ‘कुछ तथाकथित राजनीतिक दलों से जुड़े लोग स्कूलों का दौरा कर रहे हैं और बेवजह माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं.’

इससे पहले, सीजेपी की ‘स्कूल ठीक करो’ पहल की घोषणा के बाद राजस्थान सरकार ने एक आदेश जारी किया था. इसमें बिना पूर्व अनुमति के ‘बाहरी लोगों’ के सरकारी स्कूल परिसरों में प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी. साथ ही, स्कूल परिसरों की फोटोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था.

भाजपा शासित राज्य में सरकार ने स्कूलों की जर्जर स्थिति का निरीक्षण करने और उसे सामने लाने वाली किसी भी तीसरे पक्ष की पहल का स्पष्ट रूप से विरोध किया है. हालांकि, सरकार के अपने आंकड़े ही राज्य के स्कूलों की दयनीय स्थिति को उजागर करते हैं.

45,365 स्कूल भवनों में बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत, सरकार ने जनवरी में बताया था

इस साल जनवरी में राजस्थान विधानसभा में एक सवाल के जवाब में राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने बताया था कि अगस्त 2025 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य के 65,308 सरकारी स्कूलों में से 45,365 स्कूल भवनों यानी सर्वेक्षण किए गए स्कूलों के 69 प्रतिशत भवनों में बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत थी.

सरकार ने कोटा दक्षिण से भाजपा विधायक संदीप शर्मा द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में यह भी बताया था कि सर्वेक्षण के दौरान 3,768 स्कूल भवनों को जर्जर पाया गया था.

सरकार ने जनवरी में दिए अपने जवाब में यह भी बताया था कि बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत वाले 45,365 स्कूल भवनों में से जवाब दिए जाने तक केवल 4,187 स्कूलों के मरम्मत कार्यों को मंजूरी मिली थी.

सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्वीकार किया था कि पानी का रिसाव स्कूल भवनों के जर्जर होने के कारणों में से एक था.

सरकार ने आगे बताया कि सर्वेक्षण में 83,783 कक्षाएं और 16,765 शौचालय पूरी तरह जर्जर पाए गए थे, जबकि 29,753 शौचालयों में बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत थी.

1.6 लाख कक्षाओं में पक्की छत नहीं

सरकार के जनवरी में दिए गए जवाब में सामने आया एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 1,69,217 कक्षाओं में पक्की छत (रीइन्फोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट – आरसीसी) नहीं थी. केवल 50,685 कक्षाओं में आरसीसी की छत उपलब्ध थी.

स्कूल भवनों का यह सरकारी सर्वेक्षण जुलाई 2025 में झालावाड़ जिले में एक सरकारी स्कूल की इमारत गिरने की घटना के बाद अगस्त 2025 में किया गया था. 25 जुलाई 2025 को हुई इस घटना में सात बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे.

उस समय द वायर ने रिपोर्ट किया था कि स्कूल के छात्रों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने शिक्षकों को छत से मलबे के टुकड़े गिरने की जानकारी दी थी, लेकिन उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया गया. स्थानीय लोगों ने बताया था कि ग्रामीणों ने पहले भी स्कूल भवन की मरम्मत की जरूरत का मुद्दा उठाया था.

611 स्कूल बिना भवन के चल रहे

शुक्रवार को कांग्रेस विधायक और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के एक अतारांकित सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने बताया कि यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यूडीआईसीई) 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में 611 स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं. इनमें 10 बालिका विद्यालय हैं.

सरकार ने अपने जवाब में आगे बताया कि आंकड़ों के अनुसार, 2,047 स्कूलों में शौचालय नहीं हैं, जबकि 1,049 स्कूलों में छात्रों के लिए पीने के पानी की सुविधा नहीं है.

कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा, ‘जनता को गुमराह करने’ का आरोप

शुक्रवार को सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल पर कथित हमले के बाद राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला और उस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया.

जूली ने कहा, ‘गृह मंत्री को जवाब देना चाहिए, मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए. क्या आप राजस्थान में इस तरह की हिंसा को बढ़ावा देंगे? ये कौन लोग हैं, जिन्हें खुली छूट दे दी गई है और जो राजस्थान में इस तानाशाहीपूर्ण तरीके से जो मन में आ रहा है, वह कर रहे हैं? किसके इशारे पर इनका हौसला बढ़ा है? इन लोगों ने स्कूल की जांच करने पहुंचे बच्चों के साथ हिंसा की है.’

जूली ने लोगों को स्कूलों का निरीक्षण करने से रोकने वाले राजस्थान सरकार के आदेश को ‘काला कानून’ बताया.

जूली ने आगे कहा, ‘जो छात्र नेता हैं, बच्चे हैं, वे बच्चों की आवाज उठाने के लिए वहां गए थे. सरकार को इससे क्या परेशानी है? अगर वे अपनी आवाज उठाते हैं, तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए और स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए काम करना चाहिए.’

जूली ने आरोप लगाया कि सरकार के संरक्षण के बिना स्कूलों का निरीक्षण करने जाने वाले लोगों पर हमला करना संभव नहीं था.

जूली ने कहा, ‘कल मैं स्कूल की जांच करने गया था, लेकिन मुझे गेट पर ही रोक दिया गया. आज ये बच्चे जांच करने गए और उन्हें पीटा गया. यह गलत है. सरकार के संरक्षण के बिना कोई भी इस तरह का कदम नहीं उठा सकता.’

कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों ने सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल पर हुए कथित हमले की निंदा की है और हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है.

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने शुक्रवार को घटना के बाद जारी एक बयान में कहा, ‘पीयूसीएल करीब 40 सदस्यों वाले सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल पर हमला करने और उन्हें घायल करने के आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करता है. पीयूसीएल का आरोप है कि यह हमला अचानक नहीं हुआ था, बल्कि पहले से जुटाई गई भीड़ ने इसे अंजाम दिया था. पीयूसीएल का मानना है कि सरकारी स्कूलों की बिगड़ती स्थिति को सामने लाने की कोशिश कर रहे नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं पर हमला करना न केवल कानून-व्यवस्था की गंभीर विफलता है, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही पर भी हमला है.’

शिक्षा मंत्री ने दीपके की चेतावनी को ‘माहौल खराब करने की कोशिश’ बताया

अपने प्रतिनिधिमंडल पर हुए हमले के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी कि अगर हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को अगले 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार नहीं किया गया, तो इससे बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सरकारी स्कूलों के निरीक्षण के लिए जाने को ‘माहौल खराब करने की कोशिश’ बताया.

दिलावर ने शुक्रवार को एक्स पर लिखा, ‘स्कूलों को राजनीतिक अखाड़ा न बनाएं! हमारे संज्ञान में आया है कि कुछ तथाकथित राजनीतिक दलों से जुड़े लोग स्कूलों का दौरा कर रहे हैं और बेवजह माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. स्कूल बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए एक पवित्र स्थान है. यहां ध्यान शिक्षा, संस्कार और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य पर होना चाहिए, राजनीति पर नहीं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘स्वार्थी हितों और क्षणिक वाहवाही के लिए स्कूल के माहौल को खराब करने की कोशिशों के प्रति सभी को सतर्क रहना चाहिए. मैं सभी शिक्षकों, अभिभावकों और आम लोगों से अपील करता हूं कि ऐसी कोशिशों से दूर रहें और स्कूलों की गरिमा, उनके शैक्षणिक माहौल और हमारे बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए मिलकर काम करें.’

शनिवार (22 अगस्त) को दिलावर ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में कहा कि राजस्थान में सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले दो बजट में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिनमें स्कूलों के बुनियादी ढांचे के लिए 12,335 करोड़ रुपये की कार्ययोजना भी शामिल है.

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