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क्राइम: दिल्ली के फर्जी कॉल सेंटर पर राजस्थान पुलिस का छापा, 64 आरोपी गिरफ्तार; नौकरी का झांसा करते थे ठगी

क्राइम: दिल्ली के फर्जी कॉल सेंटर पर राजस्थान पुलिस का छापा, 64 आरोपी गिरफ्तार; नौकरी का झांसा करते थे ठगी राजस्थान पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी बैंक…

Amar Ujala के अनुसार31 अगस्त 2026 को 03:33 pm बजे
क्राइम: दिल्ली के फर्जी कॉल सेंटर पर राजस्थान पुलिस का छापा, 64 आरोपी गिरफ्तार; नौकरी का झांसा करते थे ठगी

सौजन्य से:- Amar Ujala

क्राइम: दिल्ली के फर्जी कॉल सेंटर पर राजस्थान पुलिस का छापा, 64 आरोपी गिरफ्तार; नौकरी का झांसा करते थे ठगी

राजस्थान पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी बैंक अधिकारी बनकर लोगों से गोपनीय जानकारी लेते थे। पुलिस ने 88 मोबाइल, फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेज बरामद किए।

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राजस्थान पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दिल्ली के उत्तम नगर स्थित फर्जी कॉल सेंटर से 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में 31 युवक और 33 युवतियां शामिल हैं। पुलिस ने मौके से 88 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों के फर्जी पहचान पत्र और बड़ी मात्रा में गोपनीय दस्तावेज बरामद किए हैं। वहीं, तीन मंजिला इमारत में काम कर रहे दो नाबालिगों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया है।

पुलिस के अनुसार, गिरोह के मुख्य आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी आकाश के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि गिरोह एक ही व्यक्ति के नाम पर जारी कई फर्जी सिम कार्ड के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन कर चुका है। यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन काउंटडाउन’ के तहत की गई।

पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश यादव के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई थी। टीम ने शनिवार रात उत्तम नगर स्थित चिह्नित ठिकाने पर छापा मारा। वहां तीन मंजिला इमारत में कुल 85 लोग मौजूद मिले, जिनमें 41 युवक, 42 युवतियां और दो नाबालिग शामिल थे। पुलिस ने पूछताछ और जांच के आधार पर ठगी के नेटवर्क में शामिल 64 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। प्राथमिक जांच में संलिप्तता नहीं मिलने पर 19 युवक-युवतियों को उनके परिजनों के साथ भेज दिया गया।

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बैंक अधिकारी बनकर जुटाते थे गोपनीय जानकारी

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य फर्जी कॉल सेंटर से लोगों को फोन कर खुद को एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और अन्य प्रमुख बैंकों का वरिष्ठ अधिकारी बताते थे। वे ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, कार्ड रिन्यू कराने और नई बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने का झांसा देते थे।

ग्राहकों को विश्वास में लेने के बाद आरोपी उनसे ओटीपी, सीवीवी, पैन कार्ड नंबर, जीमेल आईडी, जन्मतिथि और केवाईसी से जुड़ी अन्य गोपनीय जानकारियां हासिल कर लेते थे। इन जानकारियों का दुरुपयोग कर पीड़ितों के नाम पर फर्जी वित्तीय खाते खोलने और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया जाता था।

नौकरी का झांसा देकर युवाओं को देते थे ठगी की ट्रेनिंग

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह वर्क इंडिया जैसे जॉब पोर्टल के जरिए बेरोजगार युवाओं के आवेदन जुटाता था। इसके बाद उन्हें फर्जी कंपनी में नौकरी का झांसा देकर कॉल सेंटर में भर्ती किया जाता था। कर्मचारियों को 11 हजार से 15 हजार रुपये तक मासिक वेतन दिया जाता था।

ठगी के लिए कर्मचारियों को पहले से तैयार लिखित सामग्री दी जाती थी और उसी के आधार पर लोगों को फोन करने की ट्रेनिंग दी जाती थी। इस गिरोह का खुलासा एक्सिस बैंक, डीग के शाखा प्रबंधक की शिकायत के बाद हुआ। शिकायत में बैंक के नाम, लोगो और फर्जी वेबसाइट के इस्तेमाल की जानकारी दी गई थी।

मामले में साइबर क्राइम थाना डीग में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस उप अधीक्षक वीरेंद्र पाल मामले की जांच और आगे की कार्रवाई कर रहे हैं।

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