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राजस्थान के भरतपुर में सूखे कुएं में 5 करोड़ की नकली दवाइयां मिली;मास्टरमाइंड दबोचा

राजस्थान के भरतपुर में सूखे कुएं में 5 करोड़ की नकली दवाइयां मिली;मास्टरमाइंड दबोचा कुएं से दवाइयां मिलने के बाद राजस्थान ड्रग डिपार्टमेंट ने इसकी सूचना औषधि नियंत्रक उत्तर प्रदेश, औषधि निरीक्षक आगरा और संबंधित निर्माता…

Hindustan के अनुसार3 अक्टूबर 2026 को 11:05 am बजे
राजस्थान के भरतपुर में सूखे कुएं में 5 करोड़ की नकली दवाइयां मिली;मास्टरमाइंड दबोचा

सौजन्य से:- Hindustan

राजस्थान के भरतपुर में सूखे कुएं में 5 करोड़ की नकली दवाइयां मिली;मास्टरमाइंड दबोचा

कुएं से दवाइयां मिलने के बाद राजस्थान ड्रग डिपार्टमेंट ने इसकी सूचना औषधि नियंत्रक उत्तर प्रदेश, औषधि निरीक्षक आगरा और संबंधित निर्माता कंपनियों को दी। इसके बाद यूपी ड्रग डिपार्टमेंट ने आगरा के मलपुरा इलाके में जांच की।

भरतपुर के बयाना में एक सूखा कुआं... अंदर दवाइयों के सैकड़ों कार्टन और कीमत करीब 5 करोड़ रुपए। पहली नजर में यह सिर्फ चोरी-छिपे दवाइयां रखने का मामला लगा, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, इसके तार उत्तर प्रदेश से लेकर पुडुचेरी तक जुड़ते चले गए। अब इस पूरे मामले में दवाइयों के होलसेलर हिमांशु अग्रवाल को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। हिमांशु पहले भी नकली दवाओं के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए यूपी में 1 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की कोशिश की थी।

सूखे कुएं में 274 कार्टन, कीमत करीब 5 करोड़

मामला भरतपुर के बयाना तहसील के खटनावाली गांव का है। यहां एक सूखे कुएं से दवाइयों के 274 कार्टन बरामद हुए। इनमें हृदय रोग, डायबिटीज और एलर्जी से संबंधित दवाइयां शामिल हैं। बरामद दवाइयों में लोसार-50, जानुमेट, केटोरोल-एम, एलेग्रा-एम और जालरा जैसी दवाइयां बताई गई हैं।

दवाइयां असली हैं या नकली, उनकी गुणवत्ता कैसी है और उनके बैच नंबर, निर्माण व एक्सपायरी डेट में कोई गड़बड़ी है या नहीं, इसकी जांच शुरू कर दी गई है।

भरतपुर से आगरा तक पहुंचा मामला

कुएं से दवाइयां मिलने के बाद राजस्थान ड्रग डिपार्टमेंट ने इसकी सूचना औषधि नियंत्रक उत्तर प्रदेश, औषधि निरीक्षक आगरा और संबंधित निर्माता कंपनियों को दी। इसके बाद यूपी ड्रग डिपार्टमेंट ने आगरा के मलपुरा इलाके में जांच की।

जांच के दौरान एक बाड़े से भारी मात्रा में दवाइयों का स्टॉक बरामद हुआ। अधिकारियों के मुताबिक इन दवाइयों के स्टोरेज, खरीद और बिक्री से संबंधित कोई लाइसेंस नहीं मिला। इसके बाद मलपुरा थाने में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई और दवाइयां जब्त कर ली गईं।

मोबाइल में मिला दवाइयां जलाने का वीडियो

जांच में एक और चौंकाने वाला सुराग सामने आया। गिरफ्तार किए गए सलुआ उर्फ मुकीम के मोबाइल फोन से कुछ वीडियो मिले हैं। 27 सितंबर की रात के इन वीडियो में एक नदी के किनारे दवाइयों के ऊपर डीजल डालकर उन्हें जलाते हुए दिखाया गया है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर दवाइयों को नष्ट करने की जरूरत क्यों पड़ी और इन दवाओं का भरतपुर में छिपाई गई खेप से क्या संबंध है।

हिमांशु पर पहले भी नकली दवाओं का आरोप

इस मामले का सबसे अहम नाम होलसेलर हिमांशु अग्रवाल का सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार हिमांशु के खिलाफ यूपी में पहले भी नकली दवाओं को लेकर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। उसके पिता के नाम से मेडिकल स्टोर का लाइसेंस भी रहा है।

जांच अधिकारियों के मुताबिक हिमांशु को साल 2025 में नकली दवाओं के कारोबार के मामले में गिरफ्तार किया गया था। जांच में उसका पुडुचेरी में नकली दवाइयों की सप्लाई से भी कनेक्शन सामने आया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए 1 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की कोशिश के आरोप में उसे जेल भेजा गया था। दिसंबर में जेल से बाहर आने के बाद उसके दोबारा इस नेटवर्क से जुड़ने की बात जांच में सामने आई है।

यूपी में सख्ती बढ़ी तो राजस्थान में छिपाईं दवाइयां?

जांच में यह भी सामने आया है कि यूपी में नकली दवाओं को लेकर कार्रवाई तेज होने के बाद दवाइयों को राजस्थान में लाकर छिपाया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगरा से दवाइयां लाने वाले ट्रक ड्राइवर को खटनावाली गांव के इस सूखे कुएं के बारे में जानकारी कैसे मिली?

विभागीय सूत्रों के मुताबिक कुएं और आसपास के इलाके में मौजूद एक मेडिकल स्टोर के बीच किसी तरह का कनेक्शन होने की भी जांच की जा रही है।

एक्सपायरी दवाओं के पीछे भी बड़ा खेल?

सूखे कुएं से कुछ एक्सपायरी दवाइयां भी मिली हैं। अब जांच इस एंगल पर भी हो रही है कि कहीं इन दवाइयों की एक्सपायरी डेट बदलकर उन्हें दोबारा बाजार में बेचने की तैयारी तो नहीं थी।

ड्रग डिपार्टमेंट के अधिकारियों के मुताबिक एक्सपायरी दवाइयां निर्माता कंपनी को वापस करने पर पूरा क्लेम मिल सकता है। ऐसे में यह आशंका भी जांच का हिस्सा है कि कहीं एक्सपायरी दवाओं पर कंपनी से क्लेम लेने के बाद उन्हें दोबारा हासिल कर बाजार में बेचने की कोशिश तो नहीं की जा रही थी।

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