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राजस्थान पुलिस ने दिल्ली से 43-युवतियों समेत 83 को पकड़ा: क्रेडिट कार्ड के नाम पर करते थे ऑनलाइन ठगी, ग्राहकों को कॉल कर फंसाते थे - Deeg News

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Dainik Bhaskar के अनुसार31 अगस्त 2026 को 09:32 am बजे
राजस्थान पुलिस ने दिल्ली से 43-युवतियों समेत 83 को पकड़ा:  क्रेडिट कार्ड के नाम पर करते थे ऑनलाइन ठगी, ग्राहकों को कॉल कर फंसाते थे - Deeg News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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राजस्थान पुलिस ने दिल्ली से 43-युवतियों समेत 83 को पकड़ा:क्रेडिट कार्ड के नाम पर करते थे ऑनलाइन ठगी, ग्राहकों को कॉल कर फंसाते थे

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डीग पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर में छापा मारकर 43 युवतियों सहित कुल 83 लोगों को हिरासत में लिया है। ये लोग प्राइवेट बैंक के क्रेडिट कार्ड के नाम पर ऑनलाइन ठगी करते थे।

पुलिस ने एक्सिस बैंक डीग शाखा के प्रबंधक की शिकायत पर शनिवार देर रात दिल्ली पुलिस की मदद से उत्तम नगर स्थित तीन मंजिला इमारत में संचालित आनंद एंटरप्राइजेस कार्यालय पर छापा मारा। पुलिस को वहां से एक्सिस बैंक के फर्जी विजिटिंग कार्ड और आईडी कार्ड के जरिए लोगों को क्रेडिट कार्ड बेचने के मामले में नेटवर्क संचालित होने की जानकारी मिली थी।

डीग एसपी कांबले शरण गोपीनाथ ने बताया- 43 युवतियों सहित कुल 83 कर्मचारियों और ट्रेनिंग स्टाफ को हिरासत में लिया है। फिलहाल आरोपियों को कामां थाने में रखा गया है। जहां उनसे पूछताछ की जा रही है।

एक्सिस बैंक मैनेजर की शिकायत से शुरू हुई जांच

एसपी कांबले शरण गोपीनाथ ने बताया- 20 अगस्त को एक्सिस बैंक डीग शाखा के प्रबंधक फूल सिंह ने डीग के साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि कुछ लोग एक्सिस बैंक के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी आईडी और विजिटिंग कार्ड के जरिए लोगों से क्रेडिट कार्ड के लिए संपर्क कर रहे हैं। शिकायत के बाद साइबर थाना पुलिस ने संदिग्ध लोगों की पहचान के लिए तकनीकी जानकारी जुटाई।

जांच में सामने आया कि आजमगढ़ (यूपी) निवासी आकाश राठौर नामक का युवक ने एक ग्राहक को एक्सिस बैंक का क्रेडिट कार्ड दिलाने का झांसा दिया था। ग्राहक ने जब उसकी पहचान और बैंक से संबंध के बारे में जानकारी मांगी तो आकाश ने वाट्सएप के जरिए एक्सिस बैंक का विजिटिंग कार्ड और आईडी कार्ड भेज दिया।

दस्तावेज देखकर ग्राहक को संदेह हुआ। उसने दोनों दस्तावेज अपने परिचित बैंक कर्मचारी को दिखाए। बैंक कर्मचारी ने एक्सिस बैंक की विजिलेंस टीम से इनकी जांच कराई तो विजिटिंग कार्ड और आईडी कार्ड फर्जी पाए गए। इसके बाद डीग साइबर थाने में मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।

एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली तक पहुंची पुलिस

पुलिस ने आकाश राठौर को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया। पूछताछ और उसकी निशानदेही के आधार पर पुलिस को दिल्ली में चल रहे एक बड़े नेटवर्क की जानकारी मिली। इसके बाद राजस्थान पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची। उप-पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र पाल के नेतृत्व में साइबर थाना डीग की टीम ने उत्तम नगर थाने से संपर्क किया। दिल्ली पुलिस के साइबर द्वारका और उत्तम नगर थाना पुलिस की तकनीकी और जमीनी सहायता से उत्तम नगर स्थित आनंद एंटरप्राइजेस कार्यालय पर छापेमारी की गई।

तीन मंजिला इमारत में चल रहा था कॉलिंग और ट्रेनिंग का काम

पुलिस के अनुसार, जिस कार्यालय में कार्रवाई की गई, वहां बड़ी संख्या में कर्मचारी और ट्रेनिंग स्टाफ मौजूद था। कार्रवाई के दौरान कुल 83 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 43 युवतियां शामिल हैं। राजस्थान पुलिस सभी को आगे की कानूनी कार्रवाई और पूछताछ के लिए डीग लेकर आई है।

इतनी बड़ी संख्या में लोगों के एक ही कार्यालय से जुड़े होने के बाद पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यहां होने वाली गतिविधियां किस तरह संचालित की जा रही थीं और कर्मचारियों को किस प्रकार का काम सौंपा गया था।

संचालिका से पूछताछ में सामने आईं कारोबारी कड़ियां

प्रारंभिक पूछताछ में कार्यालय की संचालिका सलोनी मित्तल (47) के बारे में जानकारी सामने आई। इसके बाद जांच में पता चला कि फर्जी बैंक आईडी से ग्राहकों को कॉलिंग की जा रही थी और क्रेडिट कार्ड सेवाओं के नाम पर ठगी करते थे।

हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले में फर्जी एक्सिस बैंक आईडी और विजिटिंग कार्ड किसने तैयार किए और उनका इस्तेमाल क्यों किया गया। पुलिस इसी कड़ी को जोड़ने में जुटी है। साथ ही क्या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट का भी क्रेडिट कार्ड बनाने में डेटा लिया जा रहा था। इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

शुरुआती जांच में कॉलिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सिम कार्ड भी सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में ये सिम कार्ड संबंधित कॉलर्स के नाम पर ही पाए गए हैं और सिम कार्ड फर्जी नहीं मिले हैं।

83 लोगों से पूछताछ जारी

डीग पुलिस अब हिरासत में लिए गए सभी 83 लोगों से पूछताछ कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के तार दिल्ली या राजस्थान के अन्य साइबर ठगी के मामलों से जुड़े हैं या नहीं।

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