राजस्थान हाईकोर्ट ने 3,000 मदरसों पर बनाई अपनी नजर, सरकार को तलब कर मांगी रिपोर्ट, जानें पूरा मामला
राजस्थान के करीब 3,000 मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण और शैक्षणिक पर्यवेक्षण को लेकर हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ के मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई की है। कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब करते हुए मदरसों में पारदर्शी संचा…

सौजन्य से:- Navbharat Times
राजस्थान के करीब 3,000 मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण और शैक्षणिक पर्यवेक्षण को लेकर हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ के मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई की है। कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब करते हुए मदरसों में पारदर्शी संचालन और शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर उठाए कदमों पर रिपोर्ट मांगी है।
जयपुर: राजस्थान के मदरसों की प्रशासनिक व्यवस्था, पाठ्यक्रम और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम रुख अपनाया है। प्रदेश के करीब 3,000 मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण और शैक्षणिक पर्यवेक्षण को लेकर हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
खंडपीठ ने की याचिकाओं पर सुनवाई
न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने प्रतिपाल सिंह और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार को विस्तृत हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सरकार से पूछा है कि मदरसों में पारदर्शी संचालन और शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और भविष्य में क्या योजनाएं हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।
याचिकाकर्ता ने उठाए कई गंभीर सवाल, दिए बड़े सुझाव
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोती सिंह राजपुरोहित ने राजस्थान की मदरसा व्यवस्था को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव अदालत के समक्ष रखे।
संबद्धता और पंजीकरण की जांच: आरबीएसई (RBSE) और सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध मदरसों की अलग सूची बनाई जाए तथा मानकों पर खरे न उतरने वाले मदरसों के पंजीकरण की समीक्षा हो।
समान पाठ्यक्रम व डिजिटल ट्रैक: प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर सामान्य शिक्षा विभाग का पाठ्यक्रम लागू किया जाए। साथ ही, मदरसा बोर्ड के पोर्टल पर हर छात्र का डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज कर विशिष्ट पहचान संख्या (यूनिक स्टूडेंट आईडी ) जारी की जाए।
शिक्षकों की योग्यता और वेतन: मदरसों में केवल निर्धारित शैक्षणिक योग्यता वाले शिक्षकों को ही रखा जाए। योग्यता पूरी न करने वाले अप्रशिक्षित अध्यापकों को मानदेय या वेतन न दिया जाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और RTE: मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के अनुरूप ढाला जाए। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की सिफारिशों के तहत गैर-मुस्लिम बच्चों को शिक्षा अधिकार कानून (RTE) के तहत सामान्य शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।
वित्तीय अनुदान की समीक्षा: मदरसा संस्थानों को मिलने वाली सरकारी वित्तीय सहायता और अनुदान का पूर्ण ऑडिट कर समीक्षा की जाए।
27 अक्टूबर तक सरकार को देना होगा जवाब
अदालत ने राज्य सरकार को इन सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करने और विस्तृत कार्ययोजना के साथ हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अब 27 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में तय होगा कि सरकार मदरसों की व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है।
लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।
विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।
पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें
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