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राजस्थान निकाय चुनाव 2026: क्या बगावत के डर से थमी भाजपा-कांग्रेस की सूचियां? चुनावी सस्पेंस के पीछे क्या है माजरा

राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद भाजपा और कांग्रेस ने प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की है। बगावत और सेंधमारी के डर से दोनों दल 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपना रहे हैं। 31 अगस्त नामांकन…

Navbharat Times के अनुसार29 अगस्त 2026 को 07:32 am बजे
राजस्थान निकाय चुनाव 2026: क्या बगावत के डर से थमी भाजपा-कांग्रेस की सूचियां? चुनावी सस्पेंस के पीछे क्या है माजरा

सौजन्य से:- Navbharat Times

राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद भाजपा और कांग्रेस ने प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की है। बगावत और सेंधमारी के डर से दोनों दल 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपना रहे हैं। 31 अगस्त नामांकन की अंतिम तारीख है।

जयपुर: राजस्थान में निकाय चुनाव 2026 के लिए नामांकन प्रक्रिया दो दिन पहले शुरू हो चुकी है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस अब तक अपने प्रत्याशियों की आधिकारिक सूची जारी नहीं कर पाए हैं। अब नामांकन दाखिल करने के लिए महज दो दिन शेष हैं। नामांकन की अंतिम तारीख सोमवार 31 अगस्त है। ऐसे में दोनों दलों के सामने प्रत्याशियों के चयन के साथ-साथ संभावित बगावत को रोकने की बड़ी चुनौती है।

एक दूसरे का इंतजार

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही एक दूसरे की सूची का इंतजार कर रहे हैं। दोनों दलों को आशंका है कि यदि उन्होंने पहले प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए और टिकट से वंचित कोई प्रभावशाली स्थानीय नेता या दावेदार नाराज होकर बगावत करता है, तो विपक्षी दल उसे तुरंत अपने पाले में कर सकता है। यही वजह है कि दोनों पार्टियां टिकट वितरण में बेहद सावधानी बरत रही हैं और अंतिम समय तक नामों पर मंथन कर रही हैं।

पार्टी कार्यालयों में नेताओं का जमावड़ा

जयपुर नगर निगम में कुल 150 वार्ड हैं। इन वार्डों में पार्षद का टिकट पाने के लिए भाजपा और कांग्रेस के दावेदार पिछले कई दिनों से पार्टी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। दोनों दलों के प्रदेश कार्यालयों में लगातार दावेदारों और उनके समर्थकों की भीड़ जुट रही है। कई नेता अपने राजनीतिक संपर्कों के जरिए टिकट हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं। वहीं, टिकट की घोषणा में देरी के कारण दावेदारों की बेचैनी भी बढ़ती जा रही है।

बीजेपी में मुख्यमंत्री स्तर पर हो रहा मंथन

भाजपा में प्रत्याशियों के चयन को लेकर प्रदेश नेतृत्व लगातार बैठकें कर रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी टिकट वितरण को लेकर चल रहे मंथन में सक्रिय हैं। हाल ही में वे देर रात तक भाजपा प्रदेश कार्यालय में मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि रात करीब ढाई बजे तक अलग-अलग संभागों के प्रत्याशियों के नामों को लेकर चर्चा चलती रही। पार्टी स्थानीय समीकरण, जीत की संभावना और संभावित बगावत जैसे मुद्दों को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों के नाम तय कर रही है।

पीसीसी में जारी बैठकों का दौर

कांग्रेस में भी प्रदेश नेतृत्व प्रत्याशियों के चयन को लेकर लगातार विचार विमर्श कर रहा है। पार्टी की कोशिश है कि ऐसे चेहरों को मैदान में उतारा जाए, जिनकी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ हो और टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर असंतोष कम से कम हो। हालांकि कहा यह जा रहा है कि निकाय चुनाव में जिला स्तर पर बनी कमेटियां ही टिकट फाइनल करेगी लेकिन जिला स्तर पर तैयार किए गए पैनल में से अंतिम मुहर से पहले प्रदेश नेतृत्व की मंजूरी अहम मानी जा रही है।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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