जयपुर निगम चुनाव 2026: पुराने सूरमाओं की छुट्टी! BJP-कांग्रेस ने 83% मौजूदा पार्षदों के टिकट काटे, जानिए वजह
Jaipur Nikay Chunav 2026: जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 में बीजेपी और कांग्रेस ने एंटी-इंकम्बेंसी से बचने के लिए बड़ा दांव खेला है। परिसीमन और नए वार्ड पुनर्गठन के बीच दोनों दलों ने 82.8% यानी 207 पुराने पार्षदों के टिकट काट…

सौजन्य से:- Navbharat Times
Jaipur Nikay Chunav 2026: जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 में बीजेपी और कांग्रेस ने एंटी-इंकम्बेंसी से बचने के लिए बड़ा दांव खेला है। परिसीमन और नए वार्ड पुनर्गठन के बीच दोनों दलों ने 82.8% यानी 207 पुराने पार्षदों के टिकट काट दिए हैं।
जयपुर: जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के लिए बिछ चुकी बिसात के बीच एक ऐसी अंदरूनी लहर सामने आई है जिसने शहर की चुनावी सियासत को हिलाकर रख दिया है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने इस बार निगम चुनाव में किसी भी तरह की एंटी-इंकम्बेंसी का जोखिम न उठाते हुए पुराने चेहरों पर एक तरह की 'राजनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक' कर दी है।
2020 के पिछले चुनाव में जीत दर्ज करने वाले 250 पार्षदों में से रिकॉर्ड 82.8% (207 पार्षद) इस बार टिकट की रेस से पूरी तरह बाहर कर दिए गए हैं। दोनों ही दलों ने जयपुर के मतदाताओं के सामने 'क्लीन इमेज' और 'नए विजन' के साथ जाने के लिए पुराने दिग्गजों को दरकिनार कर एकदम नए और युवा कार्यकर्ताओं पर दांव खेला है।
परिसीमन और 'एक निगम' का फॉर्मूला पड़ा भारी
इस बार के बड़े बदलाव की सबसे मुख्य वजह जयपुर का नया भौगोलिक ढांचा है। ग्रेटर और हेरिटेज निगमों के विलय के बाद अबजयपुर में 250 के बजाय कुल 150 वार्ड तय किए गए हैं। परिसीमन और पुनर्गठन के चलते पुराने वार्डों के नंबर और उनके भौगोलिक दायरे पूरी तरह बदल गए। कई स्थापित नेताओं के जनाधार वाले मोहल्ले और कॉलोनियां कटकर दूसरे वार्डों में चली गईं, जिससे उनका राजनीतिक दावा स्वाभाविक रूप से कमजोर हो गया।
इसके अलावा, पिछले 5 सालों के कार्यकाल के दौरान स्थानीय स्तर पर पार्षदों के खिलाफ जन्मा असंतोष और पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं का भारी दबाव भी टिकट कटने का प्रमुख कारण बना।
आंकड़े: किसे मिला मौका, किसका कटा पत्ता?
पिछली बार (2020) में जीतने वाले 250 पार्षदों में से केवल 43 पूर्व विजेता ही इस बार अपनी-अपनी पार्टियों से दोबारा सिंबल हासिल करने में कामयाब रहे हैं।
दल-बदल का तड़का और बागियों को साधने की चुनौती
पुराने चेहरों की अनदेखी के बीच राजनीतिक निष्ठाओं का अदल-बदल भी दिलचस्प रहा। 9 पुराने विजेता पार्षदों ने पाला बदल लिया। इनमें से 4 कांग्रेसी नेता बीजेपी में शामिल होकर टिकट हासिल करने में सफल रहे, जबकि 2 पूर्व बीजेपी पार्षद कांग्रेस के पाले में चले गए। पिछली बार निर्दलीय के तौर पर जीते 3 सूरमाओं ने भी इस बार राष्ट्रीय दलों के सिंबल पर अपनी किस्मत आजमाई है।
अब 150 वार्डों में 11 सितंबर को होने वाले मतदान के लिए पूरी तरह नए चेहरों की फौज आमने-सामने है। हालांकि, 83 फीसदी पुराने चेहरों के टिकट कटने के बाद दोनों ही दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती असंतुष्ट बागियों को शांत करने की रहेगी।
लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।
राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।
पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत
पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

दिल्ली के घी और पंजाब की मिर्च की बिक्री पर राजस्थान में रोक, 9 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड - sale of ghee from delhi and chillies from punjab banned in rajasthan

Sainik School Vacancy 2026: राजस्थान के सैनिक स्कूल में आई भर्ती, 10वीं-12वीं पास भी कर सकते हैं अप्लाई, बढ़िया सैलरी

âकोई पिकनिक स्पॉट नहीं हैâ: राजस्थान परिवार ने नवनिर्मित एक्सप्रेसवे को पिकनिक स्पॉट में बदल दिया, बड़े पैमाने पर प्रतिक्रिया हुई; यहां परिवार के साथ घूमने के लिए 7 बेहतर जगहें हैं


