कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के विरोध में किसान और सरकार वार्ता , तीसरे चरण के बाद 2 सितंबर को जयपुर कूच का एलान
कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के विरोध में किसान और सरकार वार्ता , तीसरे चरण के बाद 2 सितंबर को जयपुर कूच का एलान किसान और सरकार के बीच कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर फिलहाल सहमति नहीं बन सकी है. Pu…

सौजन्य से:- ETV Bharat
कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के विरोध में किसान और सरकार वार्ता , तीसरे चरण के बाद 2 सितंबर को जयपुर कूच का एलान
किसान और सरकार के बीच कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर फिलहाल सहमति नहीं बन सकी है.
Published : August 26, 2026 at 7:52 PM IST
जयपुर: कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को निरस्त करने की मांग को लेकर किसान महापंचायत और राज्य सरकार के बीच गतिरोध खत्म होता नजर नहीं आ रहा है. बुधवार को जयपुर कलक्ट्रेट सभागार में एक्सप्रेस-वे निर्माण एजेंसी की ओर से किसानों के प्रतिनिधिमंडल के सामने प्रजेंटेशन दिया गया, लेकिन किसान प्रतिनिधि इससे संतुष्ट नहीं हुए. वार्ता के तीसरे चरण के बाद किसान महापंचायत ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है. किसान महापंचायत ने घोषणा की है कि 2 सितंबर को एक हजार से अधिक ट्रैक्टरों के साथ किसान जयपुर कूच करेंगे. किसान राजधानी में ट्रैक्टर रैली निकालने के साथ घेराव करने की तैयारी में हैं. किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने ट्रैक्टरों को रोकने का प्रयास किया, तो किसान उसी स्थान पर पड़ाव डाल देंगे और यह आंदोलन एक्सप्रेसवे को निरस्त किए जाने तक जारी रहेगा.
तीसरे चरण की वार्ता में निर्माण कंपनी ने दिया प्रजेंटेशन: बुधवार को जयपुर कलक्ट्रेट सभागार में सरकार और किसानों के बीच तीसरे चरण की वार्ता के तहत बैठक आयोजित हुई. इसमें जयपुर कलेक्टर संदेश नायक, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी और सड़क निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि मौजूद रहे. किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में चार जिलों के 21 सदस्यीय किसान प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में हिस्सा लिया. बैठक के दौरान निर्माण कंपनी की ओर से एक्सप्रेसवे की परियोजना और इससे होने वाले संभावित फायदे को लेकर प्रजेंटेशन दिया गया. सरकार और निर्माण एजेंसी की ओर से किसानों को परियोजना के पक्ष में सहमत करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसान प्रतिनिधियों ने प्रजेंटेशन पर असंतोष जताया. उनका कहना है कि एक्सप्रेसवे से प्रभावित होने वाले किसानों की समस्याओं और जमीन अधिग्रहण से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला.
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45 हजार से अधिक परिवार प्रभावित होने का दावा: किसान महापंचायत का कहना है कि करीब 209.5 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण से बड़ी संख्या में किसान परिवार प्रभावित होंगे. किसान नेताओं के अनुसार परियोजना से करीब 45,174 परिवारों के लगभग ढाई लाख किसान प्रभावित हो सकते हैं. किसानों ने सामाजिक समाघात आकलन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अजमेर, सीकर, जयपुर और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों में करीब 33,032 पेड़ों को काटे जाने की स्थिति बनेगी. इसके अलावा करीब 3,641 हेक्टेयर यानी 14,564 बीघा कृषि भूमि के अधिग्रहण का दावा किया गया है. किसानों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में जमीन अधिग्रहित होने से बड़ी संख्या में किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी. किसानों का कहना है कि वे अपनी जमीन और आजीविका की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखेंगे. वहीं सरकार की ओर से किसानों की आपत्तियों और एक्सप्रेसवे को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की नजर है.
उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए परियोजना: किसान महापंचायत ने आरोप लगाया कि यह एक्सप्रेसवे किसानों की मांग पर नहीं बनाया जा रहा, बल्कि कुछ उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से परियोजना लाई गई है. किसान नेताओं का दावा है कि एक तरफ छोटे और गरीब किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है, वहीं प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों की जमीन को बचाया जा रहा है. किसानों ने सरकार से परियोजना को निरस्त करने की मांग दोहराते हुए कहा कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे. किसान महापंचायत ने अपना नारा दोहराया, जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे.
किसान महापंचायत के अनुसार 2 सितंबर को होने वाली ट्रैक्टर रैली में सीकर, अजमेर, जयपुर और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों के किसान शामिल होंगे. किसान नेताओं ने कहा कि एक हजार से अधिक ट्रैक्टरों के साथ राजधानी की ओर कूच किया जाएगा और विधानसभा का घेराव किया जाएगा. महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष जाट ने कहा कि वे प्रजेंटेशन से संतुष्ट नहीं हुए. इसके बाद महापंचायत ने 2 सितंबर को प्रस्तावित ट्रैक्टर कूच को यथावत रखने का फैसला किया है.
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किसान नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन केवल सड़कों पर संघर्ष तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार के साथ संवाद का रास्ता भी खुला रहेगा. उनका कहना है कि यदि सरकार किसानों की मांगों को न्यायपूर्ण तरीके से स्वीकार करती है तो आंदोलन समाप्त किया जा सकता है. बैठक में किसान महापंचायत के प्रदेश अध्यक्ष मुसद्दीलाल यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष गोपीराम डबास, प्रदेश मंत्री बत्ती लाल बैरवा, ज्ञानचंद मीणा, महेश जाखड़, युवा प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर चौधरी समेत विभिन्न जिलों और तहसीलों के पदाधिकारी शामिल हुए. जयपुर से लालू प्रसाद यादव, कोटपूतली-बहरोड़ से बाबूलाल चौधरी, नीमकाथाना से कृष्ण कुमार यादव, सांभर-फुलेरा से गौरीशंकर मालू, श्रीमाधोपुर से बाबूलाल जाखड़, रेनवाल से राजेंद्र यादव, खंडेला से बनवारी स्वामी, कोटपूतली से हरसहाय तंवर, दूदू से हरजीराम गठाला और चौमूं से राधेश्याम बधाला सहित कई किसान प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया.
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