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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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2 हजार से ज्यादा प्रेग्नेंट महिलाएं हाई रिस्क पर:हर तीसरे दिन जांच होगी, ब्लड रिजर्व रखा जा रहा; कोटा शहर में 1 हजार से ज्यादा केस
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कोटा जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग रेड अलर्ट मोड पर है। इस साल अब तक रजिस्टर्ड 11,200 गर्भवती महिलाओं में से 2,247 महिलाएं हाई रिस्क की श्रेणी में हैं।
विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती 31 जुलाई तक के बचे हुए 8 दिन हैं। इन दिनों में 285 हाई रिस्क महिलाओं की डिलीवरी होना संभावित है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने जयपुर और जिला स्तर पर दो अलग-अलग कंट्रोल रूम बनाकर इन महिलाओं की 24 घंटे ट्रैकिंग शुरू कर दी है।
हाई रिस्क महिलाओं हर तीसरे दिन जांच होगी
कुल 2,247 हाई रिस्क महिलाओं में सबसे ज्यादा 1,092 केवल कोटा शहर से हैं। खान-पान और लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याओं के कारण शहरी महिलाओं में एनीमिया और अन्य जटिलताएं ज्यादा पाई जा रही हैं। जयपुर मुख्यालय से मिले कड़े निर्देशों के बाद अब हाई रिस्क महिलाओं के घर पर हर तीसरे दिन एएनएम जाकर जांच करेगी।
सीएमएचओ डॉ. नरेन्द्र नागर ने बताया- 6 ग्राम या उससे कम हीमोग्लोबिन (सीवियर एनीमिया) वाली महिलाओं को तुरंत ब्लड ट्रांसफ्यूजन या आयरन सुक्रोज चढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
4 रिश्तेदारों के नंबर सेव, इमरजेंसी बैकअप तैयार
सीएमएचओ डॉ. नरेन्द्र नागर ने बताया कि प्रसव के दौरान किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए विभाग ने पहली बार फोर-लेयर सेफ्टी प्लान तैयार किया है। इसमें किस महिला की डिलीवरी किस अस्पताल में होगी, यह मैपिंग पहले हो चुकी है।
परिवार के 4 ऐसे नजदीकी सदस्यों के नाम-नंबर जुटाए गए हैं, जो इमरजेंसी में तुरंत अस्पताल पहुंच सकें। एम्बुलेंस के अलावा स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक वाहन व ड्राइवर की व्यवस्था तय की गई है। RH-नेगेटिव ब्लड ग्रुप वाली महिलाओं के लिए मेडिकल कॉलेज में एडवांस ब्लड स्टॉक रिजर्व रखा जा रहा है।
ममता कार्ड पर लगेगा रेड मार्क
सीमएचओ डॉ. नरेन्द्र नागर ने बताया कि अब हर गर्भवती के 'ममता कार्ड' पर उसके हाई रिस्क का कारण स्पष्ट अंकित किया जा रहा है, ताकि अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर तुरंत इलाज शुरू कर सकें। डिलीवरी के बाद भी अगले 24 घंटे तक महिला को इंटेन्सिव मॉनिटरिंग में रखा जाएगा। एएनएम से लेकर ब्लॉक और जिला स्तरीय चिकित्सक खुद हर एक महिला की प्रोग्रेस रिपोर्ट मॉनिटर कर रहे हैं। हमारा मकसद एक भी कैजुअल्टी न होने देना है।
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