होम›खेल›कुपोषण के चौंकाने वाले आंकड़े, जयपुर में 19 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग के शिकार, 6 फीसदी अंडर वेट
खेल

कुपोषण के चौंकाने वाले आंकड़े, जयपुर में 19 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग के शिकार, 6 फीसदी अंडर वेट

कुपोषण के चौंकाने वाले आंकड़े, जयपुर में 19 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग के शिकार, 6 फीसदी अंडर वेट कई सरकारी योजानओं के बावजूद भी राजधानी जयपुर में बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं. पढ़िए आदित्य आत्रेय की रिपोर्ट... Published…

ETV Bharat के अनुसार26 सितंबर 2026 को 02:05 am बजे
कुपोषण के चौंकाने वाले आंकड़े, जयपुर में 19 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग के शिकार, 6 फीसदी अंडर वेट

सौजन्य से:- ETV Bharat

कुपोषण के चौंकाने वाले आंकड़े, जयपुर में 19 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग के शिकार, 6 फीसदी अंडर वेट

कई सरकारी योजानओं के बावजूद भी राजधानी जयपुर में बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं. पढ़िए आदित्य आत्रेय की रिपोर्ट...

Published : September 26, 2026 at 6:45 AM IST

जयपुर : बच्चों में कुपोषण को दूर करने को लेकर सरकार पोषण से जुड़ी कई योजनाएं चला रही है. इसके बाद भी जमीनी हालात चिंता करने के लायक है. पोषण ट्रैकर के अगस्त महीने के आंकड़ों को देखें तो राजधानी जयपुर में बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं. रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी जयपुर में ही 19 फीसदी बच्चे स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से अपेक्षित लंबाई से कम पाए गए. इसके साथ ही 6 प्रतिशत बच्चे अंडर वेट के शिकार हैं. एक ओर पोषण और प्रोटीन की कमी बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित कर रही है तो दूसरी ओर ज्यादा कैलोरी, जंक फूड और कम शारीरिक गतिविधि के कारण बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है.

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण पाटनी का कहना है कि देश और प्रदेश में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है. बच्चों में कैलोरी और प्रोटीन की कमी इसका प्रमुख कारण है. कुपोषण को सिर्फ कम वजन के रूप में देखना सही नहीं है. बच्चे की उम्र के हिसाब से उसकी लंबाई कम रह जाना भी कुपोषण के संकेत हैं. इसे स्टंटिंग कहा जाता है. लंबे समय तक पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स नहीं मिलने पर बच्चे का शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है.

कई जिले शामिल : रिपोर्ट में राजस्थान के कई जिलों में बच्चों के अंडरवेट होने के आंकड़े भी सामने आए हैं. राजस्थान के प्रमुख जिलों की बात करें तो जयपुर के अलावा अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर जैसे जिलों में बड़ी संख्या में बच्चे कम वजन की श्रेणी में पाए गए हैं. इससे पता चलता है कि प्रदेश के बड़े जिलों में बच्चों को पर्याप्त और संतुलित भोजन उपलब्ध कराना चुनौती बना हुआ है. यह स्थिति बताती है कि बच्चों में पोषण की समस्या अब केवल भोजन की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि असंतुलित खान-पान भी बड़ी चुनौती बन रहा है.

मोटापा भी बन रहा बच्चों के लिए खतरा : डॉ. तरुण पाटनी के अनुसार बच्चों में मोटापे के पीछे अधिक कैलोरी वाला भोजन, पैकेज्ड फूड, मीठे पेय, फास्ट फूड और कम शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण कारण हैं. बच्चों का ज्यादा समय मोबाइल और स्क्रीन पर बिताना और खेलकूद के लिए कम समय मिलना भी जीवनशैली से जुड़ी समस्या को बढ़ा रहा है. डॉ. पाटनी के अनुसार बचपन में बढ़ा मोटापा आगे चलकर स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है. बच्चों के विकास के लिए प्रोटीन बेहद महत्वपूर्ण पोषक तत्व है.

इसे भी पढे़ं. कुपोषण से मुक्ति की ओर डूंगरपुर, पिछले कुछ सालों में कुपोषण के प्रतिशत में आई कमी

शरीर की मांसपेशियों, ऊतकों और समग्र विकास में इसकी अहम भूमिका होती है. केवल पेट भरने से बच्चे का पोषण पूरा नहीं होता, बल्कि भोजन में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का संतुलन होना जरूरी है. डॉ पाटनी का कहना है कि शाकाहारी परिवारों में दाल, दूध, पनीर, सोयाबीन, मूंगफली और अन्य प्रोटीन स्रोतों को नियमित डाइट का हिस्सा बनाने की सलाह दी जाती है. हालांकि, बच्चे की प्रोटीन जरूरत उसकी उम्र, वजन और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग होती है, इसलिए किसी एक तय मात्रा को हर बच्चे के लिए सामान्य मानक नहीं माना जाना चाहिए.

गुणवत्ता पर ध्यान : बच्चों के पोषण को लेकर डॉ. पाटनी का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों के भोजन में केवल कैलोरी नहीं, बल्कि पोषण की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए. रोजाना के भोजन में दाल, दूध, पनीर, सोयाबीन, मूंगफली जैसे प्रोटीन स्रोतों के साथ हरी सब्जियां, मौसमी फल और पर्याप्त मात्रा में अन्य पोषक तत्व शामिल किए जाने चाहिए. साथ ही बच्चों को नियमित खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है.

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें