16वीं शताब्दी की तोप की चोरी: मध्य प्रदेश पुलिस ने राजस्थान में शुरू की तलाश
नरवर किले से चोरी हुई 16वीं सदी की 3500 किलो वजनी तोप राजस्थान के करौली जिले के गांवड़ा मीणा गांव में छिपाई गई है। मध्य प्रदेश पुलिस ने इस मामले में तलाश शुरू की है, और गांव के खेतों और घरों की छानबीन की जा रही है।

सौजन्य से:- Jagran
मध्य प्रदेश से 16वीं शताब्दी की तोप चोरी, राजस्थान के गांव में तलाशी जारी
मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित नरवर किले से 16वीं शताब्दी की 3500 किलो वजनी तोप चोरी हो गई, जिसे राजस्थान के करौली जिले के गांवड़ा मीणा गांव में छिपाया ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, जयपुर। रियासतकाल की करीब चार सौ वर्ष पुरानी मध्य प्रदेश के पूर्व सिंधिया राजपरिवार की चोरी हुई तोप राजस्थान में करौली जिले के गांवड़ा मीणा गांव में लाकर छिपाया गया है।
16वीं शताब्दी की 3500 किलो वजन की प्राचीन तोप 15 जुलाई की रात को मध्य प्रदेश में शिवपुरी के नरवर किले से चोरी हुई थी।
मध्य प्रदेश पुलिस की सूचना पर राजस्थान में पुलिस ने बुधवार से तलाश शुरू की है। अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक बाजार में इसकी कीमत करीब पांच करोड़ रूपए बताई जा रही है।
नरवर किले से 16वीं सदी की तोप चोरी
करीब दो सौ किलोमीटर दूर ऐतिहासिक तोप की तलाश के लिए राजस्थान में करौली जिला पुलिस गांव के खेतों और घरों की छानबीन करते हुए यह भी पता लगाने में जुटी है कि तोप को इतनी दूर लेकर आने वाले कौन लोग हैं।
करीब पांच दर्जन पुलिसकर्मी इस अभियान में जुटे हैं। पुलिस पोक्लेन (जेसीबी) मशीनों से जगह-जगह खुदाई कर रही है। पुलिस को जिस स्थान को लेकर आशंका होती है कि तोप यहां मिट्टी के नीचे दबाई जा सकती है तो मशीनों से वहीं खुदाई प्रारंभ की दी जाती है।
तोप को तलाशने के लिए मेटल डिटेक्टर का भी उपयोग किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के पुलिसकर्मियों की टीम भी गांव में पहुंची है। जानकारी के अनुसार, 15 जुलाई की रात को अज्ञात लोग नरवर किले की खुली कचहरी से चुरा कर ले गए।
अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्करी गिरोह की संलिप्तता का शक
करौली पुलिस को मध्य प्रदेश पुलिस से मिली सूचना के अनुसार, तोप को गद्दों में लपेटा गया, फिर बैरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद नरवर किले से नीचे उतारा गया। इसके बाद लोडिंग वाहन में लादकर गांवड़ी मीणा तक लेकर आया गया।
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करौली पुलिस को सूचना मिली है कि मध्य प्रदेश पुलिस एवं पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर गद्दे, लोहे के पाइप और तोप को घसीटकर ले जाने के निशान मिले हैं।
जांच करने वालों को शक है कि इसमें एंटीक चीजों की तस्करी करने वाला एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क शामिल हो सकता है।
चोरी हुई तोप नरवर किले के खुले आंगन में रखी 14 दुर्लभ तोपों में से एक थी, जो सिंधिया रियासत के दौर की थीं। चोरी के बाद, अब वहां सिर्फ 13 ऐतिहासिक तोपें बची हैं।
ये तोपें पीतल, कांसा, तांबा और अष्टधातु (आठ धातुओं का मिश्रण) से बनी हैं और इन पर फारसी और देवनागरी लिपि में कुछ लिखा हुआ है, जो इन्हें एक अहम ऐतिहासिक धरोहर बनाता है।
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