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स्कूल मरम्मत के 12000 करोड़ के बजट पर अशोक गहलोत का बड़ा दावा, कहा– 4000 करोड़ भी खर्च नहीं कर पाएगी सरकार

स्कूल मरम्मत के 12000 करोड़ के बजट पर अशोक गहलोत का बड़ा दावा, कहा– 4000 करोड़ भी खर्च नहीं कर पाएगी सरकार अशोक गहलोत ने सरकारी स्कूलों के बजट, मुआवजे, मनरेगा और दिव्यांग आयुक्त की नियुक्ति को लेकर सरकार की नीतियों पर सव…

ETV Bharat के अनुसार2 सितंबर 2026 को 11:33 pm बजे
स्कूल मरम्मत के 12000 करोड़ के बजट पर अशोक गहलोत का बड़ा दावा, कहा– 4000 करोड़ भी खर्च नहीं कर पाएगी सरकार

सौजन्य से:- ETV Bharat

स्कूल मरम्मत के 12000 करोड़ के बजट पर अशोक गहलोत का बड़ा दावा, कहा– 4000 करोड़ भी खर्च नहीं कर पाएगी सरकार

अशोक गहलोत ने सरकारी स्कूलों के बजट, मुआवजे, मनरेगा और दिव्यांग आयुक्त की नियुक्ति को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं.

Published : September 2, 2026 at 9:05 PM IST

|Updated : September 2, 2026 at 9:23 PM IST

जयपुर: प्रदेश के सरकारी स्कूलों की मरम्मत को लेकर राज्य सरकार की ओर से 12000 करोड़ रुपए की राशि खर्च करने की घोषणा पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सवाल खड़े किए हैं. गहलोत ने कहा कि जो सरकार ठेकेदारों और पेंशनर्स का पैसा नहीं दे पा रही है, वह 12000 करोड़ रुपए कहां से खर्च करेगी. गहलोत ने बुधवार रात अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि "सरकार ने स्कूलों की मरम्मत पर 12000 करोड़ रुपए की राशि खर्च करने की घोषणा की है, क्या सरकार 12000 करोड़ रुपए चुनाव के बाद खर्च करेगी? मैं दावे से कह सकता हूं कि इसमें से 4000 करोड़ रुपए भी खर्च नहीं होंगे."

जर्जर स्कूलों की मरम्मत होनी चाहिए: पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल आंकड़े बताने और घोषणा करने से स्कूलों की हालत ठीक नहीं होगी, यह केवल स्कूल के बच्चों का आक्रोश शांत करने का प्रयास है. गहलोत ने कहा कि ऐसा नहीं है कि स्कूलों की समस्या अचानक पैदा हुई है, लेकिन जो जर्जर स्कूल हैं उनकी मरम्मत होनी चाहिए. स्कूल मरम्मत मांगते हैं, छत गिर जाती है, बच्चे उसमें दब जाते हैं. जर्जर स्कूलों को लेकर अगर कोई सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहा है, तो उसके बावजूद भी उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. स्कूलों की मरम्मत समय पर होनी चाहिए और जिन इमारतों की स्थिति नाजुक है, उनकी जगह नई बिल्डिंग बननी चाहिए.

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हादसे का शिकार हुए लोगों को नहीं मिला मुआवजा: गहलोत ने कहा कि इस सरकार में भुगतान की स्थिति बहुत खराब है. हमारी सरकार ने हादसे में मारे गए व्यक्ति के परिवार को 5 लाख रुपए का मुआवजा देने के नियम बनाए थे, लेकिन यह सरकार उसका भी मुआवजा नहीं दे पा रही है. 2500 लोगों का पैसा स्वीकृत होने के बावजूद अटका पड़ा है. गहलोत ने राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को मध्य प्रदेश में अनुमति नहीं मिलने के सवाल पर कहा कि इस कार्यक्रम की अनुमति कोटा, प्रयागराज और देहरादून में भी नहीं मिली थी, लेकिन युवाओं के आक्रोश के बाद प्रशासन को अनुमति देनी पड़ी. मध्य प्रदेश में भी अनुमति देनी होगी.

बीकानेर जिलाध्यक्ष के साथ मारपीट दुर्भाग्यपूर्ण: वहीं, बीकानेर के कांग्रेस जिलाध्यक्ष मदन गोपाल के साथ हुई मारपीट को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया. गहलोत ने कहा कि टिकट सबको नहीं मिल सकता है. पुलिस को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. क्या वे पार्टी के कार्यकर्ता थे या दूसरे लोगों को बुलाकर मारपीट की गई, इसकी जांच होनी चाहिए. अगर पार्टी के लोग थे, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

सूखे से निपटने के लिए प्लान बनाए सरकार: गहलोत ने मानसून की कमजोर स्थिति को लेकर कहा कि "मैं पहले भी कई बार मुख्यमंत्री को आगाह कर चुका हूं. अभी खरीफ की बुवाई का समय चला गया है, कहीं-कहीं बारिश हो जाए तो गनीमत होगी लेकिन स्थिति बड़ी नाजुक है. अगर अभी समय रहते प्लान नहीं बनाया गया, तो लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि गांवों में मनरेगा को बंद कर दिया गया है. अब ऐसी स्थिति हो गई है कि 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार खर्च करेगी और 60 प्रतिशत केंद्र सरकार खर्च करेगी, जबकि पहले मनरेगा में पूरा पैसा केंद्र सरकार खर्च करती थी. मनरेगा बंद होने के बाद गांवों में स्थिति नाजुक है. सरकार को अभी से ही एक्शन प्लान बनाना चाहिए कि गांवों में क्या-क्या काम शुरू किए जा सकते हैं, पानी कहां से आएगा और मवेशियों के लिए चारे का प्रबंध कैसे होगा, क्योंकि अकाल और सूखे में तकलीफ होना लाजमी है. सरकार को समय रहते इस दिशा में कदम उठाने चाहिए."

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ढाई साल बाद भी दिव्यांग कमिश्नर की नियुक्ति नहीं: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने आवास पर दिव्यांगों से मुलाकात के बाद कहा कि दिव्यांगों की अपनी समस्याएं हैं, सरकार को इन्हें प्राथमिकता पर लेना चाहिए. हमारे समय में उमाशंकर दिव्यांग कमिश्नर थे, उन्होंने अच्छा काम किया था. सब उनकी तारीफ करते थे क्योंकि वे सुनवाई भी करते थे और आदेश भी देते थे. हमारी सरकार में आदेशों की पालना होती थी, लेकिन पिछले ढाई साल से दिव्यांग कमिश्नर की नियुक्ति नहीं की गई है. सरकार को चाहिए कि तुरंत दिव्यांग आयुक्त की नियुक्ति करे जिससे कि उनकी समस्याओं का समाधान हो सके.

गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार ने जयपुर और जोधपुर में बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय बनाए थे. वाइस चांसलर की भी नियुक्ति की गई थी, लेकिन यह सरकार कागजों से आगे नहीं बढ़ पाई. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन अभी 1200 रुपए मिलती है, हमने हर वर्ष 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का कानून बनाया था. मैंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर 3000 रुपए किया जाए. इसमें आधा पैसा केंद्र और आधा पैसा राज्य सरकार वहन करे क्योंकि महंगाई के इस दौर में 1200 रुपए की पेंशन पर्याप्त नहीं है.

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