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'हरियाणा का पानी राजस्थान को देना स्वीकार नहीं', यमुना जल समझौते को लेकर इनेलो ने खोला मोर्चा - unacceptable to give haryanas water to rajasthan inld launches a campaign against the yamuna water agreement

'हरियाणा का पानी राजस्थान को देना स्वीकार नहीं', यमुना जल समझौते को लेकर इनेलो ने खोला मोर्चा प्रो. संपत सिंह ने कहा कि इनेलो हरियाणा के यमुना जल अधिकारों पर किसी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा और दिल्ली में बीजेपी द्वारा…

Jagran के अनुसार29 जून 2026 को 10:24 am बजे
'हरियाणा का पानी राजस्थान को देना स्वीकार नहीं', यमुना जल समझौते को लेकर इनेलो ने खोला मोर्चा
 - unacceptable to give haryanas water to rajasthan inld launches a campaign against the yamuna water agreement

सौजन्य से:- Jagran

'हरियाणा का पानी राजस्थान को देना स्वीकार नहीं', यमुना जल समझौते को लेकर इनेलो ने खोला मोर्चा

प्रो. संपत सिंह ने कहा कि इनेलो हरियाणा के यमुना जल अधिकारों पर किसी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा और दिल्ली में बीजेपी द्वारा हरियाणा-राजस्थान के बीच ...और पढ़ें

HighLights

- इनेलो हरियाणा-राजस्थान जल समझौते का पुरजोर विरोध करेगा, संपत सिंह ने कहा

- हरियाणा के यमुना जल अधिकारों पर कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा

- 1994 के समझौते ने हरियाणा की जल हिस्सेदारी को कम किया था

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री एवं इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने कहा कि इनेलो हमेशा हरियाणा के जल अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ता रहा है और राज्य के यमुना जल में उसके वैधानिक हिस्से पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में बीजेपी ने हरियाणा और राजस्थान के बीच जो जल समझौता किया है, उसका इनेलो पुरजोर विरोध करेगा। प्रो. संपत ने याद दिलाया कि 1994 में स्वर्गीय ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में यमुना जल समझौते के विरोध में इनेलो के सभी 17 विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए प्रो. संपत सिंह ने कहा कि एसवाईएल नहर का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के बार-बार के निर्देशों के बावजूद अधूरा है, जिससे हरियाणा को लगातार जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियां हरियाणा के पानी के मामले में एक हो चुकी हैं।

कांग्रेस ने जैसे कुर्सी बचाने के लिए समझौता किया था, उसी तर्ज पर बीजेपी सरकार ने राजस्थान को पानी देने का समझौता किया है। हरियाणा का पानी हरियाणा का है। इनेलो उसकी एक-एक बूंद की रक्षा के लिए लड़ता रहेगा।

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प्रोफेसर ने कहा कि 12 मार्च 1954 को तत्कालीन पंजाब और उत्तर प्रदेश के बीच हुए यमुना जल समझौते में पूर्वी एवं पश्चिमी यमुना नहर प्रणाली के माध्यम से पंजाब के अधिकार को मान्यता दी गई थी। वर्ष 1966 में हरियाणा के गठन के बाद यह अधिकार हरियाणा को प्राप्त हुआ। कई दशकों तक लगभग 12 बीसीएम यमुना जल का उपयोग हुआ, जिसमें हरियाणा लगभग आठ बीसीएम तथा उत्तर प्रदेश लगभग चार बीसीएम जल का उपयोग करता रहा।

किंतु 12 मई, 1994 को केंद्र सरकार की पहल पर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश तथा दिल्ली के मुख्यमंत्रियों द्वारा किए गए नए समझौते के तहत हरियाणा का हिस्सा घटाकर 5.730 बीसीएम कर दिया गया, जबकि उत्तर प्रदेश को 4.032 बीसीएम, राजस्थान को 1.119 बीसीएम, दिल्ली को 0.724 बीसीएम तथा हिमाचल प्रदेश को 0.378 बीसीएम आवंटित किया गया। इ

इनेलो नेता ने कहा कि इससे हरियाणा की हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत से घटकर 46 प्रतिशत रह गई। पहले राजस्थान और दिल्ली को केवल अतिरिक्त उपलब्ध जल मानवीय आधार पर दिया जाता था, जिसे 1994 के समझौते ने स्थायी आवंटन का रूप दे दिया गया।

इसी समझौते में यमुना जल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए रेणुका, किशाऊ तथा लखवार-व्यास बांधों के निर्माण का प्रविधान किया गया था, लेकिन ये परियोजनाएं आज तक पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने विवादों का समाधान करने की बजाय वर्तमान भाजपा सरकार राजस्थान के साथ ऐसे नए समझौते कर रही है, जो हरियाणा के हितों को कमजोर करते हैं।

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