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जयपुर में प्रस्तावित UCC के खिलाफ मुस्लिम संगठनों का प्रदर्शन, सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग - Journo Mirror

जयपुर, 22 अगस्त 2026: राजस्थान में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) के खिलाफ शुक्रवार को जयपुर में मुस्लिम संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। राजस्थान मुस्लिम फोरम के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुरुषों और महिलाओं ने प्र…

Journo Mirror के अनुसार23 अगस्त 2026 को 08:55 am बजे
जयपुर में प्रस्तावित UCC के खिलाफ मुस्लिम संगठनों का प्रदर्शन, सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग - Journo Mirror

सौजन्य से:- Journo Mirror

जयपुर, 22 अगस्त 2026: राजस्थान में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) के खिलाफ शुक्रवार को जयपुर में मुस्लिम संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। राजस्थान मुस्लिम फोरम के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुरुषों और महिलाओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया।

शुक्रवार की नमाज के बाद मोती डूंगरी रोड स्थित मुस्लिम मुसाफिरखाना में प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई कि प्रस्तावित UCC मुस्लिम पर्सनल लॉ के कई प्रावधानों को प्रभावित कर सकता है। प्रदर्शन के बाद जब लोग विधानसभा की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके चलते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई।

बाद में प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान तक जाने की अनुमति दी गई, जहां अधिकारियों ने उनका ज्ञापन स्वीकार किया। ज्ञापन के जरिए संगठनों ने राजस्थान सरकार से प्रस्तावित कानून पर पुनर्विचार करने और विधेयक को वापस लेने की मांग की।

यह प्रदर्शन उस दिन हुआ जब राजस्थान की भाजपा सरकार ने विधानसभा में राजस्थान समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पेश किया। विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। ऐसे में पंचायत चुनावों के बाद नवंबर में विधेयक पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राजस्थान में व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कई पहलुओं को एक समान कानूनी ढांचे के तहत लाना है। विधेयक में विवाह के लिए विभिन्न शर्तें निर्धारित की गई हैं और जीवित जीवनसाथी के रहते दूसरा विवाह करने पर रोक का प्रावधान है। इसमें पुरुषों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष रखी गई है।

विधेयक में निकाह, सप्तपदी, आनंद कारज, पवित्र मिलन और मंगल फेरा जैसी विभिन्न धार्मिक एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत होने वाले विवाहों को भी मान्यता देने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों और कुछ अन्य समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

राजस्थान मुस्लिम फोरम ने विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कुछ समुदायों को छूट दिए जाने के कारण इसे पूरी तरह समान कानून नहीं कहा जा सकता। फोरम के सदस्य और अधिवक्ता सरवर आलम ने इसे असंवैधानिक बताते हुए आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून संविधान में मिले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने अपने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 44 का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि अनुच्छेद 44 राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है और इसे सीधे अदालत के जरिए लागू नहीं कराया जा सकता। संगठनों ने राज्य स्तरीय UCC की व्यवहारिकता के साथ-साथ समानता, गैर-भेदभाव, धार्मिक स्वतंत्रता, निजता और सांस्कृतिक अधिकारों पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई।

राजस्थान मुस्लिम फोरम ने सरकार से विधेयक पर दोबारा विचार करने की मांग की है। फोरम ने चेतावनी दी कि यदि विधेयक को आगे बढ़ाया गया तो विरोध प्रदर्शन को राज्य के अन्य हिस्सों तक भी विस्तारित किया जा सकता है।

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