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हाईकोर्ट ने RGHS नियमों की अवहेलना पर राज्य सरकार व अस्पताल से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने RGHS नियमों की अवहेलना पर राज्य सरकार व अस्पताल से मांगा जवाब राजस्थान हाईकोर्ट ने आरजीएचएस नियमों से जुड़े मामले में सुनवाई की. Published : August 8, 2026 at 8:59 PM IST जयपुरः राजस्थान हाईकोर्ट ने महावीर जय…

ETV Bharat के अनुसार8 अगस्त 2026 को 04:16 pm बजे
हाईकोर्ट ने RGHS नियमों की अवहेलना पर राज्य सरकार व अस्पताल से मांगा जवाब

सौजन्य से:- ETV Bharat

हाईकोर्ट ने RGHS नियमों की अवहेलना पर राज्य सरकार व अस्पताल से मांगा जवाब

राजस्थान हाईकोर्ट ने आरजीएचएस नियमों से जुड़े मामले में सुनवाई की.

Published : August 8, 2026 at 8:59 PM IST

जयपुरः राजस्थान हाईकोर्ट ने महावीर जयपुरिया राजस्थान हॉस्पिटल के आरजीएचएस नियमों की अवहेलना के मामले में प्रमुख चिकित्सा सचिव, राजस्थान स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आरजीएचएस परियोजना निदेशक और महावीर जयपुरिया राजस्थान हॉस्पिटल से जवाब देने के लिए कहा है. जस्टिस अनुरूप सिंघी ने यह आदेश अश्फाक अहमद नकवी की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए.

याचिका में अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि याचिकाकर्ता की पत्नी सुरैया बानो को 14 जुलाई 2025 से 29 जुलाई 2025 तक जयपुरिया राजस्थान हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया था. हॉस्पिटल ने उससे आरजीएचएस योजना में इलाज के लिए 14 जुलाई से 19 जुलाई तक 1,09,728 नकद लिए और 19 जुलाई से 21 जुलाई तक 1,22,272 लिए. वहीं, बाद में 21 जुलाई से 29 जुलाई तक इलाज के 1,73,000 लिए.

इलाज के दौरान उसकी पत्नी का निधन होने पर उससे राशि वसूलने के बाद ही शव परिजनों को दिया. प्रार्थी ने इसकी शिकायत परियोजना निदेशक से की. परियोजना निदेशक ने 26 दिसंबर 2025 के आदेश से हॉस्पिटल को आरजीएचएस नियमों के अवहेलना का दोषी माना और 30 दिन में प्रार्थी से वसूले 4.05 लाख रुपए भुगतान के निर्देश दिए. हॉस्पिटल प्रशासन ने इसकी अपील मुख्य कार्यकारी अधिकारी के यहां की.

मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अपील आंशिक तौर पर मंजूर कर 24 जून 2026 के आदेश से हॉस्पिटल को निर्देश दिया कि वह 1,96,134 रुपए प्रार्थी को दे. इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि जब हॉस्पिटल को नियमों की अवहेलना का दोषी माना है तो उससे वसूली गई पूरी राशि क्यों नहीं दिलवाई गई?. मुख्य कार्यकारी अधिकारी का आदेश गलत है. ऐसे में उसे रद्द किया जाए. इस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है.

मोबाइल डीजे के खिलाफ पीआईएल निस्तारितः राजस्थान हाईकोर्ट ने मोबाइल डीजे और लोडिंग वाहनों पर स्पीकर लगाकर उन्हें बजाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका राज्य सरकार के जवाब के बाद निस्तारित कर दिया है. जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह आदेश रजत माथुर की ओर से दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए दिए.

याचिका में अधिवक्ता दिव्यांश माथुर ने कहा कि जयपुर सहित पूरे प्रदेश में मोबाइल डीजे और वाहनों पर स्पीकर लगाकर बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए. इस संबंध में जिला कलेक्टर की ओर से 20 नवंबर, 2019 को जारी दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित की जाए. इसके अलावा रात दस से सुबह 6 बजे तक ऐसे वाहनों पर पूर्ण रोक लगाई जाए. याचिका में कहा गया कि हर पुलिस थाने में ध्वनि को नापने वाला मीटर उपलब्ध कराया जाए और 75 डीबी सीमा से अधिक ध्वनि पैदा करने वाले उपकरणों को जब्त किया जाए.

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वहीं, इसकी अवहेलना पर स्थानीय थानाधिकारी व एसडीएम को जिम्मेदार माना जाए. इसके जवाब में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि गत 20 जून तक ऐसे अवैध वाहनों के खिलाफ 29 आपराधिक मामले दर्ज कर 47 डीजे वाहन जब्त किए गए हैं. इसके अलावा यातायात पुलिस ने 580 और जयपुर पुलिस ने 625 चालान काटे गए हैं. वहीं, समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि इस संबंध में शिकायत मिलने या पुलिस के संज्ञान में मामला आने पर उस पर तत्काल कार्रवाई की जाती है. राज्य सरकार के जवाब से संतुष्ट होकर अदालत ने जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया है.

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