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Rajasthan Weather : मानसून की रफ्तार धीमी, IMD का इन जिलों को लेकर अलर्ट

Rajasthan Weather : मानसून की रफ्तार धीमी, IMD का इन जिलों को लेकर अलर्ट प्रदेश में कमजोर मानसून की वजह से खरीफ की फसल की बुआई पर असर दिखने लगा है. Published : July 11, 2026 at 1:42 PM IST जयपुर : प्रदेश में इस बार दो दि…

ETV Bharat के अनुसार11 जुलाई 2026 को 02:49 pm बजे
Rajasthan Weather : मानसून की रफ्तार धीमी, IMD का इन जिलों को लेकर अलर्ट

सौजन्य से:- ETV Bharat

Rajasthan Weather : मानसून की रफ्तार धीमी, IMD का इन जिलों को लेकर अलर्ट

प्रदेश में कमजोर मानसून की वजह से खरीफ की फसल की बुआई पर असर दिखने लगा है.

Published : July 11, 2026 at 1:42 PM IST

जयपुर : प्रदेश में इस बार दो दिन की देरी से पहुंचे मानसून ने शुरुआती सात दिनों तक जमकर बारिश की, लेकिन अब इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है. मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में मानसून कमजोर बना हुआ है और अगले कुछ दिनों तक व्यापक बारिश की संभावना नहीं है. हालांकि 18 जुलाई के बाद मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है. शनिवार को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, अलवर, भरतपुर और धौलपुर समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है.

अब तक सामान्य से अधिक बारिश, लेकिन फिर भी कमजोर : मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 10 जुलाई तक सामान्य के 88.3 मिमी के मुकाबले 100.3 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है. यानी राज्य में कुल मिलाकर सामान्य से अधिक बारिश हुई है, लेकिन इसका वितरण असमान रहा है. प्रदेश के 24 जिलों में अब भी सामान्य या उससे कम बारिश हुई है. बीते 24 घंटों में चूरू में सर्वाधिक 25.6 मिमी और पिलानी में 10.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई. श्रीगंगानगर 42 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जबकि बीकानेर और फलोदी में भी गर्मी का असर बना रहा.

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18 जुलाई तक कमजोर रह सकता है मानसून : मौसम केन्द्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार फिलहाल कोई नया मौसम तंत्र विकसित नहीं हो रहा है, इसलिए 18 जुलाई तक मानसून कमजोर रहने की संभावना है. उन्होंने बताया कि बंगाल की खाड़ी में 20 से 22 जुलाई के बीच नया सिस्टम बनने के संकेत हैं, जिसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. 16 जुलाई तक जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और बीकानेर संभाग के कुछ क्षेत्रों में छिटपुट बारिश होने के आसार हैं.

जयपुर शहर से रूठा मानसून, गांवों पर मेहरबान : राजधानी जयपुर में इस बार मानसून का मिजाज शहर और ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग देखने को मिला है. जिले में अब तक औसत 104.47 मिमी के मुकाबले 146.57 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 40 फीसदी अधिक है. हालांकि शहर में बारिश अपेक्षाकृत कम हुई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी वर्षा दर्ज की गई.

10 जुलाई तक जयपुर शहर में एयरपोर्ट पर 144.9 मिमी, आमेर में 86.0 मिमी, कलेक्ट्रेट पर 135.0 मिमी, सांगानेर में 229.0 मिमी और जेएलएन मार्ग पर 138.6 मिमी बारिश हुई. वहीं ग्रामीण इलाकों में सांभर में सर्वाधिक 311.0 मिमी, जोबनेर में 243.0 मिमी, दूदू में 220.0 मिमी, फागी में 214.0 मिमी और चौमूं में 209.0 मिमी बारिश दर्ज की गई. हालांकि इस साल जयपुर में बारिश सामान्य से अधिक रही है, लेकिन पिछली बार की तुलना में यह काफी कम है. 10 जुलाई 2025 तक राजधानी में 231.48 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जबकि इस वर्ष इसी अवधि तक सिर्फ 146.57 मिमी वर्षा हुई है. यानी पिछले साल की तुलना में करीब 85 मिमी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है.

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कम बारिश से खरीफ की बुआई प्रभावित : मानसून की कमजोर पड़ती रफ्तार का असर अब खेती पर भी दिखाई देने लगा है. प्रदेश में खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल की तुलना में करीब 30 प्रतिशत कम हुई है. पिछले वर्ष 9 जुलाई तक 116 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी थी, जबकि इस बार केवल 92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई हो सकी है. यानी करीब 23 लाख हेक्टेयर भूमि अब भी बिना बुआई के है.

प्रदेश के सात जिलों सवाई माधोपुर, हनुमानगढ़, खैरथल-तिजारा, जैसलमेर, फलोदी, पाली और सिरोही में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं. वहीं सीकर, झुंझुनूं, चूरू, श्रीगंगानगर, फलोदी, बारां और चित्तौड़गढ़ ऐसे जिले हैं जहां खरीफ बुआई अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है.

तिलहन की बुआई में ज्यादा गिरावट, महंगाई बढ़ने की आशंका : राज्य का कुल खरीफ बुआई क्षेत्र 350.85 लाख हेक्टेयर है. अब तक पिछले साल की तुलना में कुल बुआई 21 प्रतिशत कम हुई है. फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो धान की बुआई 13 प्रतिशत, दालों की 22 प्रतिशत, कपास की 23 प्रतिशत और तिलहन की बुआई सबसे अधिक 39 प्रतिशत कम दर्ज की गई है. हालांकि कृषि विभाग ने किसानों के लिए 1.74 लाख क्विंटल बीजों का रिजर्व स्टॉक तैयार रखा है.

सीकर जिले में मूंगफली और सब्जियों की फसल के प्रभावित होने की संभावना है. खाद्य व्यापार महासंघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता का कहना है कि बारिश कम होने से प्रदेश का हर वर्ग प्रभावित होगा, राजस्थान कृषि प्रधान राज्य है और बारिश पर निर्भर है, ऐसे में उपज सबसे अधिक प्रभावित होगी. उन्होंने कहा कि अगर बारिश नहीं होती है, तो फसलों को नुकसान होगा, मंडियों में किसान से लेकर व्यापारी और आम लोग इससे प्रभावित होंगे.

वहीं किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट का मानना है कि अगर मानसून लंबे समय तक कमजोर रहा और सूखे जैसे हालात बने तो इसका असर खाद्य उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ सकती है. पूर्व के आंकड़े बताते हैं कि सूखे वाले सालों में खाद्य महंगाई कई बार तेज रही है. वर्ष 2009-10 में खाद्य महंगाई 18.8 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जबकि 2015-16 में यह 6.2 प्रतिशत और 2014-15 में 4.3 प्रतिशत रही थी. हालांकि 2004-05 के सूखे के दौरान खाद्य महंगाई 5 प्रतिशत से नीचे बनी रही थी.

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किसानों को मौसम पर नजर रखने की सलाह : मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अगले कुछ दिनों तक मौसम के पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखें और बुआई संबंधी निर्णय सावधानीपूर्वक लें. विभाग का कहना है कि 18 जुलाई के बाद मानसून में फिर से तेजी आने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों को राहत मिल सकती है. फिलहाल प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है और सभी की निगाहें बंगाल की खाड़ी में बनने वाले अगले मौसम तंत्र पर टिकी हैं.

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