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सुप्रीम कोर्ट ने नदी संरक्षण के लिए रिवर कमीशन बनाया: जोजरी-बांडी-लूणी प्रदूषण पर सख्ती, नए निर्माण पर रोक - Pali (Marwar) News

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Dainik Bhaskar के अनुसार9 अगस्त 2026 को 07:15 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने नदी संरक्षण के लिए रिवर कमीशन बनाया:  जोजरी-बांडी-लूणी प्रदूषण पर सख्ती, नए निर्माण पर रोक - Pali (Marwar) News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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सुप्रीम कोर्ट ने नदी संरक्षण के लिए रिवर कमीशन बनाया:जोजरी-बांडी-लूणी प्रदूषण पर सख्ती, नए निर्माण पर रोक

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जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में नदी संरक्षण को लेकर कई अहम निर्देश दिए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मौजूदा राजस्थान रिवर बेसिन प्लानिंग अथॉरिटी को नाकाम ब

नदी बेसिन प्राधिकरण को कोर्ट ने नाकाम बताया

जोजरी-बांडी-लूणी नदी में प्रदूषण के कारण 20 लाख जिंदगियों पर मंडरा रहे खतरे से जुड़ी स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिए।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि मौजूदा राजस्थान रिवर बेसिन प्लानिंग अथॉरिटी प्रभावी तरीके से काम करने में नाकाम रही है। कोर्ट ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्वतंत्र रिवर कमीशन यानी नदी कायाकल्प प्राधिकरण गठित करने के निर्देश दिए हैं।

यह कमीशन नदियों के संरक्षण का काम देखेगा और पूरे राज्य की नदियों की हाई फ्लड लाइन का वैज्ञानिक निर्धारण करेगा।

HFL और बफर जोन तय होने तक नए निर्माण पर रोक

राज्य सरकार की ओर से अब तक किए गए खंडित प्रयासों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरे राजस्थान की नदियों की हाई फ्लड लाइन यानी HFL और पारिस्थितिक बफर जोन का वैज्ञानिक रूप से निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक नदी क्षेत्र में किसी भी तरह के नए औद्योगिक, व्यावसायिक या आवासीय निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।

7 दिन में बनेगा ICG, 3 सप्ताह में देनी होगी कार्ययोजना

- इंटीग्रेटेड कोआर्डिनेशन ग्रुप बनेगा: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 7 दिनों के भीतर इंटीग्रेटेड कोआर्डिनेशन ग्रुप यानी ICG का गठन किया जाएगा। यह समूह अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय का काम करेगा। नदियों के पारिस्थितिक सुधार के लिए 3 सप्ताह में विस्तृत कार्ययोजना कोर्ट में पेश करनी होगी। व्हाइट कैटेगरी उद्योगों की याचिकाओं पर फैसला करने के लिए कमेटी को 7 दिन का समय दिया गया है।

- SIT की मंशा पर सवाल: कोर्ट ने कहा कि SIT की ओर से गिरफ्तारियां और सख्त धाराओं का इस्तेमाल उस समय किया गया, जब कोर्ट की सुनवाई नजदीक आई। कोर्ट ने कहा कि इससे SIT की मंशा पर सवाल उठता है।

- सख्ती जारी रखनी होगी: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता यानी BNS, 2023 की धारा 272, 326 (a) और 326 (c) के तहत गंभीर आपराधिक धाराओं को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के मामलों में सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 के तहत भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 33A के तहत उद्योगों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

- QR कोड आधारित शिकायत तंत्र: आम लोग अब QR कोड के जरिए प्रदूषण से जुड़ी वीडियो और फोटो सीधे भेजकर शिकायत कर सकेंगे। शिकायत करने वाले लोगों के लिए इनाम का प्रावधान भी रहेगा। फैक्ट्रियों और ग्राम पंचायतों में QR कोड लगाए जाएंगे। शिकायत करने वाले व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी जाएगी।

- प्रशासन और पुलिस: कोर्ट ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाया है। प्रदूषण के मामलों में केवल पर्यावरण संबंधी कानूनों के तहत कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि आपराधिक धाराओं में भी केस दर्ज करने होंगे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के मामले में सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

- नई गाइडलाइन और समय-सीमा: कोर्ट के निर्देशों के तहत डार्क जोन में किसी भी जल-गहन उद्योग को अनुमति नहीं दी जाएगी।

- CETP और उद्यमियों की मिलीभगत: SIT ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पाली, जोधपुर और बालोतरा में 16 आपराधिक मामलों की समीक्षा की गई और कुछ गिरफ्तारियां की गई हैं। SIT ने अपनी रिपोर्ट में माना कि CETP अधिकारियों और औद्योगिक इकाइयों की मिलीभगत से प्रदूषण फैलाया जा रहा है।

- जमीनें वन विभाग को सौंपी जाएंगी: बालोतरा के पास खेड़ और अम्बे वैली में स्थित HRTS साइट्स के सीमेंटेड यानी RCC टैंकों को ढहाया जाएगा। इन टैंकों में जमा जहरीले पानी का वैज्ञानिक उपचार किया जाएगा। इसके बाद इन जमीनों को वन विभाग की देखरेख में शहरी जंगल यानी अर्बन फॉरेस्ट में बदला जाएगा। जोधपुर के धवा-डोली गांवों के पास की जमीन भी घास के मैदानों के लिए वन विभाग को सौंपी जाएगी।

- कांकाणी इंडस्ट्रियल पार्क और अम्बे वैली की जांच: लूणी नदी के पास प्रस्तावित रीको इंडस्ट्रियल एरिया कांकाणी के लेआउट की समीक्षा की जाएगी। यदि कोई प्लॉट HFL या बफर जोन में आता है तो उसे अनिवार्य रूप से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। अम्बे वैली इंडस्ट्रियल पार्क में कृषि भूमि के अवैध रूपांतरण, लेआउट के नियमों की अनदेखी और फाइलें गायब होने के मामले में मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए गए हैं।

- फाइनेंशियल ट्रेल की जांच: SIT की जांच केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहेगी। पूरी साजिश के पीछे हुए वित्तीय और संस्थागत लेन-देन की भी जांच की जाएगी। इससे प्रदूषण से जुड़े मामले में पैसों और संस्थागत स्तर पर हुए लेन-देन की जानकारी सामने लाने की कोशिश होगी। ऐसी सख्ती पहली बार होने जा रही है।

- व्हाइट कैटेगरी वाली फैक्ट्रियों को राहत: कम प्रदूषण फैलाने वाली व्हाइट कैटेगरी की जिन फैक्ट्रियों को सील किया गया था, उनकी याचिकाओं पर 7 दिनों के भीतर फैसला लिया जाएगा।

IIT की तकनीक से नेहड़ा के पानी की गुणवत्ता सुधारी जाएगी

जोधपुर के तनावाड़ा में तालाब का पानी गुलाबी होने के मामले में कोर्ट ने IIT जोधपुर की रिपोर्ट को माना है। इसके आधार पर मॉलिक्यूलर और डाई-स्क्रीनिंग जांच के निर्देश दिए गए हैं।

पाली के नेहड़ा बांध में दूषित पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए IIT मद्रास की 'सोलर-ऑपरेटेड सरफेस एरेटर्स' तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

इस तकनीक का उद्देश्य पानी को सीधे फिल्टर करना नहीं है। इसका उद्देश्य पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर उसकी गुणवत्ता सुधारना और प्राकृतिक जैविक शुद्धीकरण की प्रक्रिया को तेज करना है।

यह उपकरण पानी की सतह के पास या तैरते हुए मोटर के जरिए नीचे से पानी खींचता है। इसके बाद पानी को फव्वारे की तरह हवा में ऊपर की ओर छोड़ा जाता है, जिससे पानी का हवा के संपर्क में आना बढ़ता है और उसमें घुलित ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है।

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