दो बीजेपी सरकारों में ठनी: राजस्थान बोला- हमारी वन भूमि पर मध्य प्रदेश का कब्जा, छिड़ा बड़ा सीमा विवाद
राजस्थान और मध्यप्रदेश यानी दो भाजपा शासित राज्यों के बीच झालावाड़ सीमा पर 871.10 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि को लेकर बड़ा विवाद छिड़ गया है। राजस्थान का दावा है कि 1911 के रिकॉर्ड के अनुसार यह उसकी जमीन है, जबकि मध्य प्रदे…

सौजन्य से:- Navbharat Times
राजस्थान और मध्यप्रदेश यानी दो भाजपा शासित राज्यों के बीच झालावाड़ सीमा पर 871.10 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि को लेकर बड़ा विवाद छिड़ गया है। राजस्थान का दावा है कि 1911 के रिकॉर्ड के अनुसार यह उसकी जमीन है, जबकि मध्य प्रदेश का तर्क है कि वह सालों से इस क्षेत्र में पंचायत चुनाव करा रहा है।
झालावाड़: राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच एक अनोखा अंतर्राज्यीय सीमा विवाद खड़ा हो गया है। दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, लेकिन जब बात जमीन की आई, तो दोनों सरकारें आमने-सामने खड़ी हो गई हैं। राजस्थान ने मध्य प्रदेश पर झालावाड़ जिले में अपनी 871.10 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला तब और गरमा गया जब पता चला कि एमपी सरकार ने इस विवादित भूमि में से लगभग 130 हेक्टेयर हिस्सा एक निजी कंपनी को 100 मेगावाट के सोलर प्रोजेक्ट के लिए लीज पर दे दिया है।
1911 का नक्शा और वन कानून का हवाला
इस विवाद को लेकर राजस्थान के तेवर बेहद कड़े हैं। राजस्थान के 'हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्सेज' अरिजीत बनर्जी ने मध्य प्रदेश के वन बल प्रमुख को पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि यह जमीन 1961 से राजस्थान के रिकॉर्ड में आरक्षित वन के रूप में अधिसूचित है, इसलिए यहां किसी भी तरह की गैर-वानिकी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती।
भवानीमंडी के एसडीएम की रिपोर्ट में हुई पुष्टि
स्वामित्व साबित करने के लिए राजस्थान ने इतिहास के पन्ने पलटे हैं। झालावाड़ कलेक्टर की ओर से मंदसौर के डीएम को भेजे गए पत्र के अनुसार, 1911 के लैंड रिकॉर्ड के नक्शे में यह विवादित जमीन राजस्थान के सिंहपुर गांव का अभिन्न हिस्सा रही है। 1949 में राजस्थान के गठन के बाद से यह लगातार राज्य के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। हाल ही में 22 मई 2026 को भवानीमंडी के एसडीएम की रिपोर्ट में भी पुष्टि की गई है कि खसरा नंबर 1423 और 236/1 कानूनी रूप से राजस्थान की सीमा में आते हैं।
मध्य प्रदेश का पलटवार: 'हमारे नक्शे पर तो बना है राजस्थान का स्वागत द्वार'
दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश सरकार ने राजस्थान के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। एमपी के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव का तर्क है कि यह सोलर प्रोजेक्ट मंदसौर जिले की सुवासरा तहसील में आता है और जमीन पूरी तरह मध्य प्रदेश की है। यह प्रोजेक्ट एमपी जल निगम को राज्यभर में पीने के पानी की आपूर्ति के लिए आवंटित किया गया है।
एमपी के अधिकारियों ने एक और दिलचस्प दावा ठोकते हुए कहा कि सीमा पर जो 'राजस्थान स्वागत द्वार' बना है, वह भी मध्य प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किए गए नक्शों के आधार पर ही बनाया गया था। इसके अलावा, मध्य प्रदेश प्रशासन पिछले कई सालों से इस विवादित क्षेत्र की दो ग्राम पंचायतों में चुनाव संपन्न कराता आ रहा है, जो व्यावहारिक रूप से उनके अधिकार क्षेत्र को साबित करता है।
सियासी रसूख और प्रशासनिक टकराव
इस पूरे विवाद में एक सियासी एंगल भी सामने आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जिस निजी कंपनी को सोलर प्रोजेक्ट का काम मिला है, उसके मालिकों के संबंध मध्य प्रदेश के ही एक केंद्रीय मंत्री से हैं। झालावाड़ वन विभाग ने फरवरी 2026 में कंपनी को काम रोकने का नोटिस दिया था, लेकिन राजस्थान का आरोप है कि एमपी प्रशासन और कंपनी के लोगों ने वन अधिनियमों का उल्लंघन करते हुए जेसीबी और भारी मशीनों से निर्माण कार्य जारी रखा।
मुख्य सचिव स्तर पर आपात मंथन
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्य की अगली रणनीति तय करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। वह इस विवाद पर पहले भी दो बार बैठकें कर चुके हैं। पर्यावरण मामलों के वकील तपेश्वर सिंह भाटी का कहना है कि यदि राजस्थान ने इस मामले को मजबूती से नहीं लड़ा, तो वह अपने रिकॉर्ड से करीब 870 हेक्टेयर का एक बड़ा वन क्षेत्र हमेशा के लिए खो देगा।
लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।
राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।
पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत
पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें
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