सुरक्षाकर्मियों का बार-बार बीमार होना कोई साजिश तो नहीं?: बेनीवाल का अमित शाह को पत्र, सरकार पर लगाए आरोप
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सौजन्य से:- Amar Ujala
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सुरक्षाकर्मियों का बार-बार बीमार होना कोई साजिश तो नहीं?: बेनीवाल का अमित शाह को पत्र, सरकार पर लगाए आरोप
Sat, 18 Jul 2026 10:46 PM IST
नागौर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 10:46 PM IST
सार
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के बार-बार बीमार पड़ने से उनकी सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
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विस्तार
नागौर से लोकसभा सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राजस्थान सरकार की ओर से सांसदों को उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की लगातार तबीयत बिगड़ने और उन्हें बार-बार बदले जाने से उनकी सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बेनीवाल ने पत्र में लिखा है कि राजस्थान पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे सुरक्षा कर्मी बार-बार बीमार पड़ रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा में बड़ी चूक हो रही है। उन्होंने दो हालिया घटनाओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार, 11 जुलाई को कांस्टेबल सुनील बिश्नोई की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल ले जाना पड़ा। इसके बाद 15 जुलाई को कांस्टेबल बलवीर गुर्जर की हालत गंभीर हो गई।
दोनों मामलों में सांसद को स्वयं अस्पताल पहुंचना पड़ा और चिकित्सकीय व्यवस्था करनी पड़ी। सांसद ने पत्र में लिखा, 'यह प्रक्रिया न केवल मेरी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि किसी संभावित खतरे या साजिश की स्थिति में मुझे अनावश्यक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।' उन्होंने यह भी कहा कि कई बार उन्हें बिना सुरक्षा के बाहर निकलना पड़ रहा है, जिससे उनकी जान को खतरा बना हुआ है।
हनुमान बेनीवाल, जो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संस्थापक और राजस्थान की प्रमुख विपक्षी आवाजों में से एक हैं, ने इस व्यवस्था को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने मांग की कि बीमार पुलिसकर्मियों को तत्काल रिजर्व पुलिस लाइन भेजा जाए और उनकी जगह स्थायी एवं पूरी तरह स्वस्थ सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाए।
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क्या हैं पत्र के राजनीतिक मायने?
यह पत्र राजस्थान सरकार के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। बेनीवाल लगातार राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार, किसान विरोधी नीतियों और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाते रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए ये सवाल केंद्र और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा सकते हैं। खासकर लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी सांसदों की सुरक्षा को लेकर केंद्र की नजर अधिक है। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री को भेजी गई यह शिकायत राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।
ये भी पढ़ें- Rajasthan: हवेली में दफन खजाना मिलने का दावा, मालिक ने ठेकेदार पर सोने-चांदी की संपत्ति हड़पने का केस कराया
बेनीवाल ने पत्र में यह भी लिखा है कि उन्होंने इस संबंध में राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (DGP) और अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) को भी अवगत कराया, लेकिन जिला स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि नागौर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सांसद की सुरक्षा में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने बेनीवाल के पत्र का समर्थन करते हुए इसे राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल बताया है। वहीं, राज्य सरकार के सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित की जा रही है और सभी शिकायतों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हनुमान बेनीवाल का यह पत्र केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि राजस्थान में विपक्षी नेताओं को उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी बड़ा राजनीतिक प्रश्न खड़ा करता है। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है।
पुलिस का पक्ष
कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक (आरपीएस) आशाराम चौधरी ने कहा, 'सांसद महोदय की सुरक्षा में तैनात सभी पुलिसकर्मी पूरी तरह स्वस्थ हैं। यदि कोई पुलिसकर्मी पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं होता, तो वह अवकाश पर होता। ड्यूटी पर केवल पूरी तरह फिट जवानों की ही तैनाती की जाती है। आरोप किसने लगाए हैं, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। मैं इतना ही कह सकता हूं कि जो जवान पूरी तरह स्वस्थ हैं, उन्हीं की ड्यूटी लगाई गई है। यदि कोई जवान बीमार है, तो वह अवकाश पर होगा।'
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दोनों मामलों में सांसद को स्वयं अस्पताल पहुंचना पड़ा और चिकित्सकीय व्यवस्था करनी पड़ी। सांसद ने पत्र में लिखा, 'यह प्रक्रिया न केवल मेरी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि किसी संभावित खतरे या साजिश की स्थिति में मुझे अनावश्यक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।' उन्होंने यह भी कहा कि कई बार उन्हें बिना सुरक्षा के बाहर निकलना पड़ रहा है, जिससे उनकी जान को खतरा बना हुआ है।
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हनुमान बेनीवाल, जो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संस्थापक और राजस्थान की प्रमुख विपक्षी आवाजों में से एक हैं, ने इस व्यवस्था को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने मांग की कि बीमार पुलिसकर्मियों को तत्काल रिजर्व पुलिस लाइन भेजा जाए और उनकी जगह स्थायी एवं पूरी तरह स्वस्थ सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाए।
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क्या हैं पत्र के राजनीतिक मायने?
यह पत्र राजस्थान सरकार के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। बेनीवाल लगातार राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार, किसान विरोधी नीतियों और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाते रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए ये सवाल केंद्र और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा सकते हैं। खासकर लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी सांसदों की सुरक्षा को लेकर केंद्र की नजर अधिक है। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री को भेजी गई यह शिकायत राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।
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बेनीवाल ने पत्र में यह भी लिखा है कि उन्होंने इस संबंध में राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (DGP) और अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) को भी अवगत कराया, लेकिन जिला स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि नागौर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सांसद की सुरक्षा में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने बेनीवाल के पत्र का समर्थन करते हुए इसे राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल बताया है। वहीं, राज्य सरकार के सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित की जा रही है और सभी शिकायतों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हनुमान बेनीवाल का यह पत्र केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि राजस्थान में विपक्षी नेताओं को उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी बड़ा राजनीतिक प्रश्न खड़ा करता है। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है।
पुलिस का पक्ष
कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक (आरपीएस) आशाराम चौधरी ने कहा, 'सांसद महोदय की सुरक्षा में तैनात सभी पुलिसकर्मी पूरी तरह स्वस्थ हैं। यदि कोई पुलिसकर्मी पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं होता, तो वह अवकाश पर होता। ड्यूटी पर केवल पूरी तरह फिट जवानों की ही तैनाती की जाती है। आरोप किसने लगाए हैं, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। मैं इतना ही कह सकता हूं कि जो जवान पूरी तरह स्वस्थ हैं, उन्हीं की ड्यूटी लगाई गई है। यदि कोई जवान बीमार है, तो वह अवकाश पर होगा।'
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