जयपुर बन सकता है देश का अगला ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हब, खुलेंगे रोजगार के द्वार
जयपुर बन सकता है देश का अगला ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हब, खुलेंगे रोजगार के द्वार GCC क्या हैं, जयपुर को इससे क्या फायदा होगा और किन चुनौतियों को पार करना होगा? जानिए इस खास रिपोर्ट में... Published : July 19, 2026 at 12:…

सौजन्य से:- ETV Bharat
जयपुर बन सकता है देश का अगला ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हब, खुलेंगे रोजगार के द्वार
GCC क्या हैं, जयपुर को इससे क्या फायदा होगा और किन चुनौतियों को पार करना होगा? जानिए इस खास रिपोर्ट में...
Published : July 19, 2026 at 12:40 PM IST
जयपुर : गुलाबी नगरी जयपुर अब केवल पर्यटन, विरासत और संस्कृति की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहती. राजस्थान सरकार की नई ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति ने शहर को देश के अगले बड़े टेक्नोलॉजी हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में नई उम्मीदें जगाई हैं. सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में 200 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने और करीब 1.5 लाख डायरेक्ट एंप्लॉयमेंट क्रिएट करने का लक्ष्य रखा है. सवाल ये है कि क्या जयपुर वास्तव में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे स्थापित आईटी शहरों की कतार में खड़ा हो पाएगा?
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर : ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के ऐसे केंद्र होते हैं, जहां केवल बैक ऑफिस या सपोर्ट सर्विसेज नहीं बल्कि कंपनी के सबसे महत्वपूर्ण टेक्निकल और स्ट्रैटेजिक काम किए जाते हैं. इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंजीनियरिंग डिजाइन, फिनटेक और रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसे हाई-वैल्यू ऑपरेशन शामिल होते हैं. पिछले कुछ सालों में दुनिया की बड़ी कंपनियां लागत कम करने और बेहतर टैलेंट पाने के लिए भारत के टियर-2 शहरों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने पर जोर दे रही हैं.
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जयपुर पर है दुनिया की नजर : आईटी एक्सपर्ट और एंटरप्रेन्योर गजेंद्र आदित्य का कहना है कि दुनिया भर की कंपनियां अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं. बढ़ती लागत और ट्रैफिक जैसी समस्याओं के कारण कंपनियां टियर-2 शहरों की ओर रुख कर रही हैं. जयपुर के पास लगभग वो सभी आधारभूत खूबियां मौजूद हैं, जिन्हें आज ग्लोबल कंपनियां किसी नए इन्वेस्टमेंट प्लेस में तलाशती हैं. दिल्ली-एनसीआर से बेहतर कनेक्टिविटी, कंपेरटिवली कम ऑपरेटिंग कॉस्ट, कम ट्रैफिक, बेहतर क्वालिटी ऑफ लाइफ और तेजी से विकसित होता शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर जयपुर को अन्य टियर-2 शहरों की तुलना में मजबूत स्थिति में खड़ा करता है. यही वजह है कि कई कंपनियां अब बेंगलुरु और गुरुग्राम जैसे महंगे शहरों के विकल्प के रूप में जयपुर को गंभीरता से देख रही हैं. उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर अब केवल जमीन और इमारत नहीं देखते बल्कि शहर की लॉन्ग टर्म स्टेबिलिटी, कानून व्यवस्था, जीवन स्तर और टैलेंट अवेलेबिलिटी को भी महत्व देते हैं.
जयपुर में जीसीसी को लेकर वर्तमान स्थिति : गजेंद्र आदित्य के अनुसार जयपुर और आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर वर्तमान में करीब 150 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं. उनका अनुमान है कि अगले 3 से 5 सालों में ये संख्या 200 से ज्यादा हो सकती है. यदि ये लक्ष्य पूरा होता है तो करीब 1.5 से 2 लाख डायरेक्टर और इनडायरेक्ट एंप्लॉयमेंट क्रिएट होने की संभावना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार भी इन्वेस्टर्स को आकर्षित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, उद्योग अनुकूल नीतियां, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दे रही है. इसका उद्देश्य राजस्थान को केवल पारंपरिक उद्योगों का नहीं बल्कि नॉलेज बेस्ड इकोनामी का प्रमुख केंद्र बनाना है.
स्टार्टअप्स को मिलेगा फायदा : बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के आने से केवल रोजगार ही नहीं बढ़ेगा बल्कि पूरा स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत होगा. गजेंद्र आदित्य ने बताया कि जयपुर में मल्टीनेशनल कंपनीज अपने जीसीसी स्थापित करती हैं तो लोकल स्टार्टअप्स के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे. उन्हें ग्लोबल कंपनियों के साथ टेक्नोलॉजी पार्टनर बनने, जॉइंट प्रोजेक्ट्स पर काम करने और इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंच बनाने का मौका मिलेगा. इसके साथ ही वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट इनोवेशन और रिसर्च कल्चर को भी बढ़ावा मिलेगा. Saas (सॉफ्टवेयर एस ए सर्विस), AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), साइबर सिक्योरिटी और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को सबसे ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है.
युवाओं के लिए बड़ा अवसर : राजस्थान से हर वर्ष हजारों इंजीनियर, आईटी और मैनेजमेंट ग्रेजुएट निकलते हैं, लेकिन बेहतर अवसरों के लिए उन्हें बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है. यदि जयपुर में बड़े पैमाने पर GCC स्थापित होते हैं तो स्थानीय युवाओं को अपने ही शहर में वैश्विक स्तर की नौकरियां मिल सकेंगी. इससे टैलेंट का पलायन कम होगा और प्रदेश के युवाओं को अपने परिवार के साथ रहते हुए बेहतर करियर बनाने का अवसर मिलेगा. गजेंद्र आदित्य का कहना है कि आने वाला समय केवल डिग्री का नहीं बल्कि स्किल का समय है. AI आधारित तकनीकों में दक्ष युवाओं की मांग सबसे ज्यादा रहेगी. राज्य सरकार भी स्किल डेवलपमेंट और ग्लोबल सर्टिफिकेशन पर काम कर रही है ताकि स्थानीय युवाओं को इन अवसरों का लाभ मिल सके.
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जयपुर की सबसे बड़ी ताकत : आईटी विशेषज्ञों के अनुसार जयपुर कई मामलों में अन्य शहरों से अलग पहचान रखता है. सीतापुरा, महिंद्रा सेज, वीकेआई और RIICO के औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार के साथ-साथ जयपुर मेट्रो का विस्तार, बेहतर सड़क नेटवर्क और नई औद्योगिक परियोजनाएं शहर को निवेश के लिए तैयार कर रही हैं. यही कारण है कि कई कंपनियां अब जयपुर को लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में देख रही हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का Grade-A ऑफिस स्पेस, हाई-स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी और बेहतर एयर कनेक्टिविटी पर अभी और तेजी से काम करने की जरूरत है.
रिसर्च और इनोवेशन का बनेगा नया केंद्र : शिक्षाविद् अरुण जैन के अनुसार यदि जयपुर में बड़े पैमाने पर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित होते हैं तो शहर केवल रोजगार का केंद्र नहीं रहेगा बल्कि रिसर्च और इनोवेशन का नया केंद्र भी बनेगा. जयपुर पहले ही शिक्षा और मेडिकल सेक्टर में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है. यदि इसी गति से ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर विकसित होते हैं तो आने वाले सालों में शहर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिसर्च, इनोवेशन और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बन सकता है. इससे युवाओं को वैश्विक स्तर की परियोजनाओं पर काम करने और वैल्यू क्रिएटर बनने का अवसर मिलेगा.
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बड़े शहरों से तुलना जल्दबाजी : शिक्षाविदों के अनुसार जयपुर की तुलना बेंगलुरु, हैदराबाद या पुणे से करना फिलहाल उचित नहीं होगा क्योंकि इन शहरों ने दशकों में अपना मजबूत आईटी इकोसिस्टम तैयार किया है. हालांकि, जयपुर के पास अपनी अलग ताकत है. इसमें कम लागत, बेहतर लिविंग क्वालिटी, बढ़ता स्टार्टअप नेटवर्क, मजबूत शिक्षा आधार और शहरी विस्तार शामिल है. यदि इन खूबियों को सही नीति और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का साथ मिले तो जयपुर अपनी अलग पहचान के साथ देश का प्रमुख ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हब बन सकता है. इससे न केवल लाखों युवाओं को अपने शहर में रोजगार मिलेगा, बल्कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था ग्लोबल लेवल पर और मजबूत होगी.
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