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जोधपुर नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी हलचल, टिकट के लिए लॉबिंग तेज

जोधपुर नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी हलचल, टिकट के लिए लॉबिंग तेज जोधपुर नगर निगम चुनाव को लेकर BJP और कांग्रेस में टिकट को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है. पार्टी दफ्तरों में टिकट के दावेदारों और कार्यकर्ताओं की भीड़ बढ़…

ABP News के अनुसार22 अगस्त 2026 को 01:54 pm बजे
जोधपुर नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी हलचल, टिकट के लिए लॉबिंग तेज

सौजन्य से:- ABP News

जोधपुर नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी हलचल, टिकट के लिए लॉबिंग तेज

जोधपुर नगर निगम चुनाव को लेकर BJP और कांग्रेस में टिकट को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है. पार्टी दफ्तरों में टिकट के दावेदारों और कार्यकर्ताओं की भीड़ बढ़ने लगी है. इस निगम में कुल 100 वार्ड हैं

राजस्थान इन दिनों पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुका है. राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद भजनलाल सरकार ने प्रदेश में निकाय चुनाव की तैयारियां पूरी कर ली हैं. चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही प्रदेश में आचार संहिता लागू हो चुकी है और चुनावी रण सज गया है. ऐसे में जोधपुर जिला निकाय चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति में हॉट सीट बन गया है.

जोधपुर नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं. यही वजह है कि नगर निगम का बोर्ड किस पार्टी के पक्ष में जाएगा और महापौर की कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंकनी शुरू कर दी है.

सरकार के कामकाज का चुनाव पर कितना होगा असर?

खास बात यह है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यकाल के तीन साल पूरे होने को हैं. ऐसे में निकाय चुनाव के नतीजों को सरकार के कामकाज और संगठन की जमीनी पकड़ से जोड़कर भी देखा जा रहा है. जोधपुर जैसे बड़े शहर के चुनावी परिणाम प्रदेश की सियासत में महत्वपूर्ण संदेश देने वाले हो सकते हैं.

गहलोत-शेखावत के गढ़ में सियासी ताकत का इम्तिहान

जोधपुर राजस्थान की राजनीति के दो बड़े नेताओं का गृह जिला भी है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जोधपुर में मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है. वहीं केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी इसी जिले से आते हैं. ऐसे में नगर निगम चुनाव दोनों ही नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन सकता है. भाजपा और कांग्रेस दोनों की कोशिश होगी कि अधिक से अधिक वार्डों में जीत हासिल कर नगर निगम में अपना बोर्ड बनाया जाए और महापौर की कुर्सी पर कब्जा जमाया जाए.

टिकट के लिए दावेदारों में बढ़ी हलचल!

बताया जा रहा है कि भाजपा और कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर अंदरखाने रणनीति तैयार की जा रही है. पार्टी दफ्तरों में टिकट के दावेदारों और कार्यकर्ताओं की भीड़ बढ़ने लगी है. हर दावेदार अपनी राजनीतिक पकड़, जनसंपर्क और संगठन में सक्रियता का हवाला देते हुए टिकट की दावेदारी पेश कर रहा है.

वहीं वार्डों के आरक्षण की लॉटरी के बाद कई सीटें आरक्षित होने से कई संभावित दावेदारों की गणित बिगड़ गई है. ऐसे में जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं की सीट आरक्षित हो गई, वे अब अपने लिए दूसरी सुरक्षित सीट तलाशने में जुट गए हैं. दूसरी ओर आरक्षित और अनारक्षित सीटों पर नए चेहरों ने भी अपनी दावेदारी मजबूत करनी शुरू कर दी है.

महापौर पद को लेकर भी लॉबिंग तेज

नगर निगम चुनाव में पार्षद का टिकट हासिल करने के साथ-साथ भाजपा और कांग्रेस के भीतर महापौर पद के संभावित चेहरों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. दोनों दलों में कई नेता अपनी-अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं. हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और चुनावी समीकरणों के आधार पर ही होगा.

जोधपुर नगर निगम चुनाव में स्थानीय मुद्दों की क्या भूमिका?

जोधपुर नगर निगम चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा, संगठन की मजबूती और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ भी अहम भूमिका निभाएगी. पार्टी के जिला अध्यक्षों से लेकर विधायक और संगठन के सीनियर पदाधिकारी तक चुनावी मैदान में पूरी ताकत के साथ मोर्चा संभालेंगे.

अब नजर इस बात पर है कि 100 वार्ड वाले जोधपुर नगर निगम में जनता किसे जनादेश देती है. क्या भाजपा अपना बोर्ड बनाने में सफल होगी या कांग्रेस एक बार फिर निगम की सत्ता में वापसी करेगी? इन सवालों का जवाब चुनावी नतीजे देंगे, लेकिन फिलहाल टिकट की दौड़ से लेकर महापौर की कुर्सी तक जोधपुर का सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प होता नजर आ रहा है.

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