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कोर्ट की खबरें : आपराधिक मामला लंबित रहने तक नहीं मिल सकती पदोन्नति, पेंशन परिलाभ रोकने पर सरकार-हाईकोर्ट प्रशासन पर हर्जाना

कोर्ट की खबरें : आपराधिक मामला लंबित रहने तक नहीं मिल सकती पदोन्नति, पेंशन परिलाभ रोकने पर सरकार-हाईकोर्ट प्रशासन पर हर्जाना निलंबन खत्म होने से ही सीलबंद कवर नहीं खुलेगा. रिटायर जज के पेंशन परिलाभ रोकने पर हाईकोर्ट की अ…

ETV Bharat के अनुसार10 जुलाई 2026 को 04:08 am बजे
कोर्ट की खबरें : आपराधिक मामला लंबित रहने तक नहीं मिल सकती पदोन्नति, पेंशन परिलाभ रोकने पर सरकार-हाईकोर्ट प्रशासन पर हर्जाना

सौजन्य से:- ETV Bharat

कोर्ट की खबरें : आपराधिक मामला लंबित रहने तक नहीं मिल सकती पदोन्नति, पेंशन परिलाभ रोकने पर सरकार-हाईकोर्ट प्रशासन पर हर्जाना

निलंबन खत्म होने से ही सीलबंद कवर नहीं खुलेगा. रिटायर जज के पेंशन परिलाभ रोकने पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी और फैसले...

Published : July 9, 2026 at 9:40 PM IST

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति से जुडे मामले में स्पष्ट किया है कि केवल निलंबन खत्म होने के आधार पर किसी कर्मचारी का पदोन्नति का सीलबंद कवर नहीं खोला जा सकता. यदि कर्मचारी के खिलाफ चार्जशीट के बाद क्रिमिनल केस लंबित है, तो उसे पदोन्नति का लाभ भी नहीं दिया जा सकता. यदि ऐसा होने लगा तो इससे विभागीय कामकाज में अव्यवस्था फैल सकती है.

एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा व जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार की अपील पर दिया. खंडपीठ ने कहा कि विभागीय जांच और आपराधिक केस दोनों अलग-अलग हैं और दोनों को एक जैसा नहीं मान सकते. हालांकि, इस मामले में कर्मचारी बाद में आपराधिक केस से बरी हो चुका है और सरकार उसका सीलबंद कवर पहले ही खोल चुकी थी. इसलिए अदालत ने उसे मिली राहत बरकरार रखी है.

खंडपीठ ने इस मामले में एकलपीठ के 28 मार्च 2025 के निर्णय के उस हिस्से को कानून के मुताबिक सही नहीं माना, जिसमें कहा था कि निलंबन खत्म होने के बाद, भले ही कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक केस लंबित हो, उसका सीलबंद कवर खोलकर पदोन्नति पर विचार किया जा सकता है. इस मामले में राज्य सरकार ने एकलपीठ के आदेश को अपील के जरिए खंडपीठ में चुनौती दी थी.

अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने बताया कि यह मामला सरकारी कर्मचारी डॉ. अनिल कुमार पालीवाल की पदोन्नति से जुडा हुआ है. पालीवाल ने निलंबन खत्म होने के बाद पदोन्नति नहीं मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. उनकी याचिका पर एकलपीठ ने पालीवाल के पक्ष में फैसला दिया था. एकलपीठ के आदेश को राज्य सरकार ने खंडपीठ में चुनौती दी थी.

रिटायर जज के पेंशन परिलाभ रोके, राज्य सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन पर एक लाख रुपए का हर्जाना : राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 साल पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से रिटायर अधिकारी को ग्रेच्युटी का लाभ अदा नहीं करने पर हाईकोर्ट प्रशासन और राज्य सरकार पर एक लाख रुपए का हर्जाना लगाया है. इसके साथ ही अदालत ने बकाया राशि नौ फीसदी ब्याज सहित अदा करने को कहा है. एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश मातादीन गर्ग की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए.

याचिका में अधिवक्ता सोगत रॉय ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता मार्च, 1999 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से रिटायर हुआ था. रिटायर होने के दो साल तक सरकारी भवन खाली नहीं करने पर संपदा निदेशक से हाईकोर्ट प्रशासन को पत्र लिखा था. जिसमें कहा गया था कि उसकी ग्रेच्युटी में से 57 हजार 454 रुपए काटकर शेष राशि जारी कर दी जाए. इसके बावजूद भी याचिकाकर्ता को 27 साल बीतने के बाद भी याचिकाकर्ता को शेष बकाया राशि नहीं दी गई.

इस संबंध में याचिकाकर्ता की ओर से संबंधित अधिकारियों को कई बार अभ्यावेदन भी दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. याचिकाकर्ता 81 साल का सीनियर सिटीजन है और ग्रेच्युटी राशि रुकने से वह प्रभावित हो रहा है. ऐसे में उसे बकाया राशि दिलाई जाए. जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन पर एक लाख रुपए का हर्जाना लगाते हुए बकाया राशि ब्याज सहित अदा करने को कहा है.

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