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सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपनी सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठाए

राजस्थान के नागौर लोकसभा सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपनी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस के कुछ अधिकारियों ने जानबूझकर उनकी सुरक्षा में बीमार पुलिसकर्मियों को लगा दिया।

Navbharat Times के अनुसार19 जुलाई 2026 को 05:01 am बजे
सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपनी सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठाए

सौजन्य से:- Navbharat Times

नागौर लोकसभा सीट से सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपनी सुरक्षा में जानबूझकर गंभीर बीमारियों से ग्रसित पुलिसकर्मियों को लगाने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने अब केंद्रीय गृहमंत्री और सीएम को पत्र भी लिखा है।

जयपुर: लोकसभा सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपनी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस के कुछ अधिकारियों ने अपनी हठधर्मिता और दुर्भावनापूर्ण कार्यशैली की वजह से जानबूझकर उनकी सुरक्षा में बीमार पुलिसकर्मियों को लगा दिया। एक नहीं तीन तीन सुरक्षाकर्मी गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे जिन्हें सांसद की सुरक्षा में तैनात कर दिया। सांसद हनुमान बेनीवाल ने तीनों सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया और मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर शिकायत की है। उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी सुरक्षा का मामला नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा पर गंभीर मामला है।

मेरी सुरक्षा के साथ खिलवाड़

नागौर लोकसभा सीट से सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि नागौर जिले में लंबे समय से एसपी नहीं है। बिना एसपी वाले जिले में जिम्मेदार कार्मिकों ने जानबूझकर गंभीर बीमारियों से ग्रसित पुलिसकर्मियों को मेरी सुरक्षा ड्यूटी पर लगाना न केवल मेरी सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है, बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि किसी संभावित अप्रिय घटना या पुलिसकर्मी के स्वास्थ्य संबंधी संकट की स्थिति में मुझे अनावश्यक रूप से जिम्मेदार ठहराकर मेरी सार्वजनिक छवि एवं प्रतिष्ठा को धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है।

इन 3 सुरक्षाकर्मियों का जिक्र किया बेनीवाल ने

1. सुनील विश्नोई (कांस्टेबल) जो पूर्व से ही न्यूरोलॉजी संबंधी गंभीर बीमारी से पीड़ित था। दिनांक 11 जुलाई को जयपुर में सुनील की तबीयत अचानक अत्यधिक बिगड़ गई। मैं स्वयं देर रात उसे सवाई मानसिंह अस्पताल, जयपुर लेकर गया जहां उनके समुचित उपचार की व्यवस्था करवाई।

2. बलबीर गुर्जर (कांस्टेबल) दिनांक 15 जुलाई को जयपुर से लौटते समय उनकी तबीयत गंभीर रूप से खराब हो गई। मैंने उन्हें तत्काल नागौर के अस्पताल में भर्ती करवाया। चिकित्सकों से उपचार सुनिश्चित करवाया और बाद में उन्हें एम्स, जोधपुर रेफर करवाया। चिकित्सकों द्वारा उनके हृदय संबंधी पुरानी बीमारी से ग्रसित होने की संभावना व्यक्त की गई है।

3. आज मेरी सुरक्षा हेतु भेजे गए सीताराम (कांस्टेबल) भी स्वास्थ्य की दृष्टि से अस्वस्थ हैं। इसलिए उसे वापस पुलिस लाइन भेज दिया गया है।

खतरे का इनपुट था तो सुरक्षा क्यों हटाई

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे गए पत्र में सांसद हनुमान बेनीवाल ने पूछा कि कुछ समय पहले राजस्थान पुलिस के इंटेलिजेंस को मेरी सुरक्षा को लेकर बड़े खतरे के इनपुट मिला था। जिसके आधार पर पुलिस एस्कॉर्ट सहित हथियारबंद कमांडो मेरी सुरक्षा में तैनात किए गए थे। कुछ समय बाद बिना सूचना दिए ही सुरक्षा को हटा दिया गया। बेनीवाल ने कहा कि कम से कम उन्हें यह तो बताना चाहिए था कि मेरी सुरक्षा को लेकर जो इनपुट थे, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है?

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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