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नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राजस्थान विधानसभा में उठाया CJP से मारपीट का मुद्दा

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राजस्थान विधानसभा में उठाया CJP से मारपीट का मुद्दा मानसून सत्र के दूसरे दिन भी विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। कांग्रेस जहां विधानसभा गेट पर विधायकों को रोके जाने…

Hindustan के अनुसार21 अगस्त 2026 को 01:55 pm बजे
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राजस्थान विधानसभा में उठाया CJP से मारपीट का मुद्दा

सौजन्य से:- Hindustan

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राजस्थान विधानसभा में उठाया CJP से मारपीट का मुद्दा

मानसून सत्र के दूसरे दिन भी विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। कांग्रेस जहां विधानसभा गेट पर विधायकों को रोके जाने और CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट को मुद्दा बनाकर सरकार से जवाब मांग रही है

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने गुरुवार को कांग्रेस विधायकों को विधानसभा के गेट पर रोके जाने और स्कूलों का निरीक्षण करने गए CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट का मुद्दा उठाया। जूली ने सरकार से दोनों मामलों में जवाब मांगा और चर्चा कराने की मांग की। हालांकि, स्पीकर ने प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति नहीं दी।

इसके बाद कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कांग्रेस विधायकों ने ‘सरकार भगोड़ी है’ लिखे पोस्टर भी लहराए। इसके जवाब में भाजपा विधायकों ने राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और उन्हें ‘भगोड़ा’ और ‘चोर’ बताया। लगातार हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में दोपहर 1 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

जूली बोले- स्कूलों में गए लोगों को पीटा जा रहा, सरकार चुप क्यों है?

विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही टीकाराम जूली ने सीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था की हालत खराब है। ऐसे में जब लोग स्कूलों की स्थिति देखने के लिए जा रहे हैं तो उनके साथ मारपीट की जा रही है। सरकार इस पूरे मामले पर चुप क्यों है?

जूली ने कहा कि विधानसभा में आने वाले विधायकों को पहले कभी इस तरह गेट पर नहीं रोका गया। उन्होंने कहा कि भाजपा जब विपक्ष में थी, तब भी इसी गेट से विधायक प्रदर्शन करते हुए विधानसभा में आते थे। ऐसे में गुरुवार को कांग्रेस विधायकों को गेट पर क्यों रोका गया, इसकी जांच होनी चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस विधायक जनता के मुद्दे उठाने के लिए विधानसभा आए थे, लेकिन उन्हें अंदर आने नहीं दिया गया। बाद में उनके बारे में अनर्गल बातें की गईं कि वे विधानसभा में आना ही नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता से जुड़े मुद्दों पर सदन में चर्चा करना चाहती है।

प्रश्नकाल में नहीं मिली मुद्दा उठाने की अनुमति

जूली ने जब यह मुद्दा उठाया तो स्पीकर ने प्रश्नकाल के दौरान इसे उठाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कांग्रेस विधायक वेल में आ गए और नारेबाजी करने लगे। कांग्रेस विधायकों के हंगामे के बीच भाजपा विधायक भी नारेबाजी करने लगे।

सत्ता पक्ष की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए गए। भाजपा विधायकों ने उन्हें ‘भगोड़ा’ और ‘चोर’ बताते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। स्पीकर ने कांग्रेस विधायकों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा।

सरकार भगोड़ी है के पोस्टर लहराए

हंगामे के दौरान कांग्रेस विधायक सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए। विधायकों ने ‘सरकार भगोड़ी है’ लिखे पोस्टर लहराए। दोनों पक्षों की नारेबाजी के बीच कांग्रेस और भाजपा विधायकों में नोकझोंक भी हुई।

स्थिति को देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। प्रश्नकाल में करीब पांच मिनट ही कार्यवाही चल सकी।

संसदीय कार्यमंत्री बोले- कांग्रेस लोकतंत्र की हत्यारी

हंगामे के दौरान संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र की हत्यारी है और उसके पास कोई मुद्दा नहीं है। उन्होंने कांग्रेस विधायकों पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।

वहीं, सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने गुरुवार को कांग्रेस विधायकों को विधानसभा गेट पर रोके जाने को लेकर कहा कि उनके साथ कुछ अन्य लोग और असामाजिक तत्व भी थे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस विधायक इन लोगों को विधानसभा के अंदर लाना चाहते थे, इसलिए उन्हें गेट पर रोका गया।

12 बजे कार्यवाही शुरू हुई तो फिर नारेबाजी

दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन कांग्रेस विधायकों का हंगामा जारी रहा। कांग्रेस विधायक लगातार नारेबाजी करते रहे। स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष और सत्ता पक्ष को आश्वासन दिया कि शून्यकाल के बाद दोनों पक्षों को अपनी बात रखने के लिए पांच-पांच मिनट का समय दिया जाएगा।

इसके बावजूद कांग्रेस विधायक शांत नहीं हुए। नारेबाजी और हंगामे के कारण शून्यकाल में भी सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। शून्यकाल में करीब 18 मिनट ही कार्यवाही हो पाई।

आश्वासन के बाद भी नहीं थमा विवाद

स्पीकर के बार-बार समझाने और नेता प्रतिपक्ष को बोलने का समय देने के आश्वासन के बावजूद कांग्रेस विधायक अपनी मांग पर अड़े रहे। लगातार हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही दूसरी बार दोपहर 1 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

इस तरह मानसून सत्र के दूसरे दिन भी विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। कांग्रेस जहां विधानसभा गेट पर विधायकों को रोके जाने और CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट को मुद्दा बनाकर सरकार से जवाब मांग रही है, वहीं भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगा रही है।

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