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जयपुर की दीवारों से आगे, अब शहर की रूह संवारने की मुहिम, 5 लाख परिवारों तक पहुंचेगा हरित संगम

जयपुर की दीवारों से आगे, अब शहर की रूह संवारने की मुहिम, 5 लाख परिवारों तक पहुंचेगा हरित संगम शहर में 1000 समूह तैयार हो चुके . प्रत्येक समूह से 20 घर जुड़े हैं. इन्हीं के जरिए स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण का संदेश पहुं…

ETV Bharat के अनुसार2 अक्टूबर 2026 को 03:04 pm बजे
जयपुर की दीवारों से आगे, अब शहर की रूह संवारने की मुहिम, 5 लाख परिवारों तक पहुंचेगा हरित संगम

सौजन्य से:- ETV Bharat

जयपुर की दीवारों से आगे, अब शहर की रूह संवारने की मुहिम, 5 लाख परिवारों तक पहुंचेगा हरित संगम

शहर में 1000 समूह तैयार हो चुके . प्रत्येक समूह से 20 घर जुड़े हैं. इन्हीं के जरिए स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण का संदेश पहुंचाना है.

Published : October 2, 2026 at 8:02 PM IST

जयपुर: जयपुर को सुंदर बनाने की कहानी सिर्फ सड़कों से कचरा हटाने या इमारतों को संवारने तक सीमित नहीं है. वर्ष 1727 में सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बसाया गया यह शहर अपनी नियोजित बसावट, चौपड़ों, बाजारों, हवेलियों, मंदिरों और जीवंत कारीगरी परंपरा के कारण आज विश्व विरासत में पहचान रखता है. UNESCO भी जयपुर की ऐतिहासिक पहचान में उसके शहरी नियोजन और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं को महत्वपूर्ण मानता है. इसी ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान को नागरिक भागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से 'आपणो जयपुर हरित संगम' अभियान का आगाज शुक्रवार को जवाहर सर्किल स्थित पत्रिका गेट से हुआ. अभियान की शुरुआत 'एक पेड़ पूर्वजों के नाम' कार्यक्रम से हुई. उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने पौधरोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. सांसद मंजू शर्मा विशिष्ट अतिथि रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता महापौर सुनील कोठारी ने की.

आपणो जयपुर-हरित संगम की संयोजक नीता बुचरा ने बताया कि अभियान का उद्देश्य सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि जयपुरवासियों में शहर के प्रति जिम्मेदारी और अपनत्व की भावना विकसित करना है. अभियान के तहत अगले तीन महीनों में 5 लाख परिवारों तक जनजागरण पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. अभियान की खासियत यह है कि इसके पीछे पहले से काम कर रहे स्थानीय समूहों को आधार बनाया जा रहा है. शहर में करीब 1000 समूह तैयार हो चुके हैं और प्रत्येक समूह से करीब 20 घर जुड़े हैं. अब इन्हीं समूहों के जरिए स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े संदेश घर-घर पहुंचाने की योजना है.

जयपुर की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना : अभियान में घरों से निकलने वाले जैविक कचरे को घर में ही खाद में बदलने का मॉडल विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. पहले चरण में 1000 समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो आगे अपने मोहल्लों में दूसरी महिलाओं को प्रशिक्षित करेंगी. हर घर में कम से कम तीन पौधे लगाने और उनके संरक्षण के लिए भी लोगों को प्रेरित किया जाएगा. अभियान का एक अलग पहलू जयपुर की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना है. महिलाओं की टोलियों के जरिए विवाह गीत, तीज, गणगौर, नवरात्र, गरबा और होली से जुड़े लोकगीतों को सहेजने और आगे बढ़ाने की गतिविधियां होंगी. मंदिरों, श्मशान स्थलों और सामुदायिक केंद्रों के संरक्षण में भी स्थानीय भागीदारी और श्रमदान को बढ़ावा देने की योजना है.

बच्चे और युवा होंगे बदलाव के वाहक: संयोजक बुचरा ने बताया कि स्कूलों में स्वच्छता, पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े कार्यक्रम होंगे. खेल और योग प्रतियोगिताओं के साथ मोबाइल फास्टिंग जैसे प्रयोग भी अभियान में शामिल किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य परिवार के साथ संवाद और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है. प्लास्टिक के इस्तेमाल में कमी, नशे के खिलाफ जनजागरण, भिक्षावृत्ति के मुद्दे पर सामाजिक चेतना और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी गतिविधियां प्रस्तावित हैं. उन्होंने कहा कि जयपुर की विरासत सिर्फ उसकी इमारतों में नहीं, बल्कि उसके बाजारों, चौपड़ों, धार्मिक स्थलों, शिल्प और सामाजिक परंपराओं में भी जीवित है. UNESCO ने भी ऐतिहासिक जयपुर के बाजारों, धार्मिक इमारतों, पारंपरिक घरों और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं को उसकी विरासत का हिस्सा माना है. एक पेड़ पूर्वजों के नाम से शुरू होने वाली यह पहल आने वाले 10 वर्षों में शहर के पर्यावरण के साथ उसके सामाजिक और सांस्कृतिक चरित्र को भी जोड़ने का प्रयास कर रही है.

एक पेड़ पूर्वजों के नाम: इस मौके पर उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि पूर्वजों के नाम पौधा लगाने की पहल लोगों को पर्यावरण से भावनात्मक रूप से जोड़ने वाली है. अब पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी समझना भी जरूरी है. दीया कुमारी ने कहा कि जयपुर को स्वच्छ और सुरक्षित रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. वर्ष 2027 में जयपुर की स्थापना के 300 वर्ष पूरे होने हैं. ऐसे में इससे पहले शहर को बेहतर बनाने के लिए सरकार, प्रशासन और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा.

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