राजस्थान में दलित की हत्या मामले में सभी 40 आरोपी बरी, कोर्ट बोला- ठोस सबूत नहीं मिले - all 40 acquitted in 2015 rajasthan dalit killing prosecution failed to provide concrete proof says court
राजस्थान में दलित की हत्या मामले में सभी 40 आरोपी बरी, कोर्ट बोला- ठोस सबूत नहीं मिले नागौर की SC/ST अदालत ने 2015 के चर्चित डांगावास हत्याकांड के सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया, जिसमें छह लोगों की मौत हुई थी। ...और पढ़े…

सौजन्य से:- Jagran
राजस्थान में दलित की हत्या मामले में सभी 40 आरोपी बरी, कोर्ट बोला- ठोस सबूत नहीं मिले
नागौर की SC/ST अदालत ने 2015 के चर्चित डांगावास हत्याकांड के सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया, जिसमें छह लोगों की मौत हुई थी। ...और पढ़ें
HighLights
- नागौर की अदालत ने डांगावास हत्याकांड के सभी 40 आरोपी बरी किए।
- अभियोजन पक्ष ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा, गवाह पहचान न कर सके।
- 2015 के इस मामले में छह लोगों की मौत हुई थी, पांच दलित।
डिजिटल डेस्क, अजमेर। राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) मामलों की एक विशेष अदालत ने बुधवार को 2015 के चर्चित डांगावास हत्याकांड के सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया। इस घटना में छह लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच दलित थे। इनमें से तीन को कथित तौर पर ट्रैक्टर से कुचल दिया गया था।
आरोपियों पर राजस्थान के नागौर जिले के डांगावास गांव में 23 बीघा जमीन से दलित परिवारों को जबरन हटाने के लिए उन पर हिंसक हमला करने का आरोप था। हालांकि, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष उन आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा, जिन पर सीबीआई ने आरोप लगाए थे।
गवाह नहीं कर पाए आरोपियों की पहचान
अभियोजन पक्ष ने 82 गवाह पेश किए जबकि शिकायतकर्ता ने आठ और गवाह सामने रखे। अदालत ने पाया कि इनमें से ज्यादातर गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर सके। आरोपियों के वकील ने कहा, "अदालत ने पाया कि सीबीआई ने अपनी जांच सही ढंग से नहीं की थी और अभियोजन पक्ष इस मामले में किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहा।"
हाई कोर्ट में दी जाएगी फैसले को चुनौती
अभियोजन पक्ष के वकील महिपाल लोट्टियान ने कहा, "हम विस्तृत फैसले को पढ़ेंगे और कानूनी सलाह लेने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट में बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देंगे।"
बचाव पक्ष के वकील ने क्या कहा?
वहीं, बचाव पक्ष के वकील महेंद्र चौधरी ने कहा कि सीबीआई ने इस मामले में गलत लोगों को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया था। उन्होंने मामले की जटिलताओं के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, "सीबीआई घटना की असल वजह को शामिल करने में नाकाम रही, क्योंकि गांव के घीसा राम ने बिना सही म्यूटेशन (जमीन के रिकॉर्ड में नाम बदलने की प्रक्रिया) के चिमन राम को जमीन बेच दी थी, जिससे 2015 में यह दुश्मनी पैदा हुई। सीबीआई ने इस मामले में 40 लोगों को आरोपी बनाया जो घटना में शामिल ही नहीं थे। उसने गलत जांच की और इसीलिए सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है।"
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पीड़ितों के परिवारों ने निराशा जाहिर करते हुए पूछा, "जब कोई दोषी नहीं पाया गया तो फिर उन छह लोगों को किसने मारा?" बुधवार को जब फैसला सुनाया जाना था तो मेड़ता अदालत के बाहर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। जब बरी किए जाने का फ़ैसला सुनाया गया तो भीड़ में खुशी की लहर दौड़ गई।
डांगावास की इस झड़प में बंदूकें, कुल्हाड़ियां और लाठियां इस्तेमाल की गई थीं और हंगामे के दौरान कई गाड़ियां जला दी गई थीं। इस घटना ने राज्य को हिलाकर रख दिया था और दलितों के खिलाफ हुई हिंसा के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। कई सालों की देरी के बाद हाईकोर्ट के दखल के बाद आरोपियों ने सरेंडर करना शुरू किया।
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