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आसाराम को राहत: राजस्थान हाईकोर्ट का सरकार को आदेश, 20 दिन की पैरोल पर करें रिहा

आसाराम को राहत: राजस्थान हाईकोर्ट का सरकार को आदेश, 20 दिन की पैरोल पर करें रिहा हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी आसाराम की 20 दिनों की पैरोल लागू करने का आदेश देते हुए राज्य सरकार की दलीलें खारिज की. Published :…

ETV Bharat के अनुसार6 अक्टूबर 2026 को 11:05 am बजे
आसाराम को राहत: राजस्थान हाईकोर्ट का सरकार को आदेश, 20 दिन की पैरोल पर करें रिहा

सौजन्य से:- ETV Bharat

आसाराम को राहत: राजस्थान हाईकोर्ट का सरकार को आदेश, 20 दिन की पैरोल पर करें रिहा

हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी आसाराम की 20 दिनों की पैरोल लागू करने का आदेश देते हुए राज्य सरकार की दलीलें खारिज की.

Published : October 6, 2026 at 4:14 PM IST

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग के साथ यौन शोषण के आरोपी आसाराम को पैरोल पर रिहा करने के लिए पूर्व में जारी आदेश की पालना करने का निर्देश सरकार को दिया है. जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष आसाराम की ओर से एक याचिका दायर की गई थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि कोर्ट द्वारा अगस्त महीने में दी गई पैरोल के आदेश की पालना नहीं की जा रही है. इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिया कि आसाराम को पैरोल पर रिहा किया जाए और उसकी अनुपालना रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए. सुनवाई के दौरान आसाराम के वकीलों ने कहा कि तीन अगस्त को कोर्ट ने बीस दिन की पैरोल मंजूर की थी, लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें रिहा नहीं किया.

सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीएल भाटी ने दलील दी कि आसाराम को गुजरात के गांधीनगर की एक अदालत ने भी दोषी माना है, जहां के हाईकोर्ट ने उसकी पैरोल याचिका को खारिज कर दिया था. खंडपीठ ने इस दलील पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ऐसा कोई कानूनी कारण नहीं दर्शा सकी, जिससे 3 अगस्त 2026 के आदेश को रद्द या निलंबित माना जाए. इस कोर्ट द्वारा जारी आदेश पर गुजरात हाईकोर्ट द्वारा आपातकालीन पैरोल खारिज किए जाने के फैसले का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है. ऐसे में आसाराम को रिहा कर अनुपालना रिपोर्ट पेश की जाए.

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सरकार की ओर से नहीं दी गई चुनौती: सुनवाई के दौरान सरकार के अधिवक्ता से पूछा गया कि क्या सरकार ने तीन अगस्त के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिससे यह आदेश निरस्त या निलंबित हो सके? इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि सरकार की ओर से ऐसी कोई याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर नहीं की गई है. इस पर खंडपीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में तीन अगस्त को जारी किए गए आदेश की पालना अनिवार्य रूप से होनी चाहिए.

यह है मामला: आसाराम को साल 2018 में जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. इसके बाद से आसाराम लंबे समय से जेल में बंद है. कोर्ट ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उसे कई बार अस्पताल जाने की अनुमति दी थी. इसी दौरान 3 अगस्त को राजस्थान हाईकोर्ट ने उसकी 20 दिनों की पैरोल मंजूर की थी, जिसे लागू न किए जाने पर अब कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. इसके अलावा, सूरत की दो बहनों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के एक अन्य मामले में भी जनवरी 2023 में गांधीनगर की अदालत ने आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

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