होम›शिक्षा-करियर›12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर जयपुर के चंद्रकांत चौहान, दर्शन के साथ लोगों को अंगदान के प्रति कर रहे जागरूक
शिक्षा-करियर

12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर जयपुर के चंद्रकांत चौहान, दर्शन के साथ लोगों को अंगदान के प्रति कर रहे जागरूक

12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर जयपुर के चंद्रकांत चौहान, दर्शन के साथ लोगों को अंगदान के प्रति कर रहे जागरूक राजस्थान हाईकोर्ट से शुरू हुई यात्रा आंध्र प्रदेश पहुंची, करीब 11 हजार KM पैदल चलने का लक्ष्य. Published :…

ETV Bharat के अनुसार3 अक्टूबर 2026 को 05:04 am बजे
12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर जयपुर के चंद्रकांत चौहान, दर्शन के साथ लोगों को अंगदान के प्रति कर रहे जागरूक

सौजन्य से:- ETV Bharat

12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर जयपुर के चंद्रकांत चौहान, दर्शन के साथ लोगों को अंगदान के प्रति कर रहे जागरूक

राजस्थान हाईकोर्ट से शुरू हुई यात्रा आंध्र प्रदेश पहुंची, करीब 11 हजार KM पैदल चलने का लक्ष्य.

Published : October 3, 2026 at 9:44 AM IST

जयपुर/काकीनाडा : राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर बेंच में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता चंद्रकांत चौहान 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए करीब 11 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकले हैं. 27 अप्रैल 2026 को शुरू हुई उनकी यात्रा पांच महीने से अधिक समय बाद आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले तक पहुंच चुकी है. अब तक वे 3500 किलोमीटर से अधिक पैदल सफर तय कर चुके हैं. चौहान की यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जागरूकता से भी जुड़ी है. वे रास्ते में लोगों को देहदान और अंगदान के प्रति जागरूक कर रहे हैं. साथ ही अलग-अलग राज्यों के लोगों से मिलकर उनकी संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली को करीब से समझ रहे हैं.

केदारनाथ से काशी और देवघर तक का सफर : जयपुर से निकलने के बाद चौहान केदारनाथ पहुंचे और बाबा केदारनाथ के दर्शन किए. इसके बाद करौली बाबा के दर्शन करते हुए काशी पहुंचे, जहां काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए. काशी में वे करीब छह दिन रुके और परिवार के सदस्यों को भी वहां बुलाया. इसके बाद यात्रा झारखंड के देवघर पहुंची, जहां उन्होंने बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए. यात्रा के दौरान पुरी सहित कई धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों से भी वे गुजरे. अब आंध्र प्रदेश में उनका अगला प्रमुख पड़ाव श्रीशैलम स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग है.

गांवों तक पहुंचकर समझ रहे भारत : चौहान की यात्रा की खास बात यह है कि वे बड़े शहरों और मुख्य मार्गों तक सीमित नहीं रहते. कई बार मुख्य सड़क से चार-पांच किलोमीटर अंदर गांवों और स्थानीय इलाकों तक चले जाते हैं. इस दौरान उन्हें ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति और प्रकृति को करीब से देखने का मौका मिलता है. रास्ते में कई बार अनजान लोग भोजन-पानी उपलब्ध कराते हैं या दूसरी तरह से मदद करते हैं. चौहान के मुताबिक, ऐसे अनुभवों ने उन्हें यह समझाया कि भारत को केवल शहरों और राजमार्गों से नहीं जाना जा सकता. देश को समझने के लिए गांवों और वहां रहने वाले लोगों के बीच जाना जरूरी है.

आंध्र प्रदेश में भाषा की चुनौती : काकीनाडा पहुंचने के बाद तेलुगु भाषा उनके लिए नई चुनौती बनी है. बातचीत में परेशानी होती है, लेकिन स्थानीय लोगों के सहयोग से वे होटल, भोजन और रास्ते से जुड़ी जरूरतें पूरी कर रहे हैं. उनका कहना है कि भाषा भले अलग हो, लेकिन लोगों का व्यवहार और सहयोग इस दूरी को कम कर देता है. स्थानीय भोजन और संस्कृति को समझना भी उनके लिए यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है.

बारिश और मुश्किलों के बीच जारी रहा सफर : पांच महीने से अधिक की पदयात्रा में बारिश, तेज धूप, थकान और कई बार रात में ठहरने की जगह नहीं मिलना जैसी परिस्थितियां सामने आईं. हाल के दिनों में बारिश के कारण यात्रा की गति भी प्रभावित हुई, लेकिन चौहान का कहना है कि उनका हौसला कायम है. यात्रा के दौरान अनजान लोगों से मिलने वाली मदद ने भी उन्हें आगे बढ़ने का भरोसा दिया है. वे कहते हैं कि अब हर परिस्थिति को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं होती.

इसे भी पढ़ें:अलवर में एक मंदिर ऐसा, जहां श्रद्धालुओं को होते हैं 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन, अनोखा है इतिहास

'Advocate on Foot' के जरिए सामाजिक संदेश : चंद्रकांत चौहान ने अपनी यात्रा को 'Advocate on Foot' की पहचान दी है. उनका मानना है कि अधिवक्ता की भूमिका अदालत तक सीमित नहीं होनी चाहिए. समाज के बीच जाकर लोगों से संवाद करना और उन्हें उनके अधिकारों एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है. इसी सोच के साथ वे पदयात्रा को देहदान और अंगदान की जागरूकता से जोड़ रहे हैं.

चौहान बताते हैं कि यात्रा शुरू करने से पहले भविष्य, पेशे और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों को लेकर कई तरह की चिंताएं रहती थीं. लेकिन लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच सफर करने से उनकी सोच में बदलाव आया. उनका कहना है कि इंसान प्रयास कर सकता है, लेकिन हर परिणाम उसके नियंत्रण में नहीं होता. यात्रा ने उन्हें परिस्थितियों को स्वीकार करना और वर्तमान में जीना सिखाया है. उनके शब्दों में, "जब भगवान यहां तक लेकर आए हैं तो आगे का रास्ता भी वही दिखाएंगे. मेरा काम चलते रहना है."

अब श्रीशैलम की ओर : 3500 किलोमीटर से अधिक पैदल चल चुके चंद्रकांत चौहान अब आंध्र प्रदेश में हैं. काकीनाडा से उनका अगला प्रमुख पड़ाव श्रीशैलम का मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग है. इसके बाद यात्रा दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों से होते हुए बाकी ज्योतिर्लिंगों की ओर बढ़ेगी. करीब 11 हजार किलोमीटर की यह पदयात्रा उनके लिए अब केवल धार्मिक संकल्प नहीं रह गई है. यह आस्था, सामाजिक जागरूकता, आत्ममंथन और देश को करीब से समझने का सफर बन चुकी है. चौहान कहते हैं, "अब मंजिल की चिंता नहीं है, रास्ते की चिंता नहीं है. मेरा भरोसा रास्ते पर नहीं, उस पर है जो रास्ता दिखा रहा है.

इसे भी पढ़ें: भीलवाड़ा में ऐसा शिवालय, जहां एक ही शिवलिंग में 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करते हैं भोले के भक्त

यात्रा से पहले किया देहदान का संकल्प : पदयात्रा शुरू करने से पहले चंद्रकांत चौहान ने जयपुर के सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के शरीर रचना विभाग में देहदान के लिए स्वैच्छिक सहमति संबंधी प्रपत्र दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है. चौहान का कहना है कि मृत्यु के बाद शरीर को नष्ट करने के बजाय यदि वह किसी दूसरे के काम आ सके तो उसका उपयोग अधिक सार्थक होगा. उनका प्रयास है कि यात्रा के जरिए लोगों को देहदान और अंगदान के महत्व के बारे में जानकारी दी जाए. उनके मुताबिक, मृत्यु के बाद अंग जरूरतमंद मरीजों के लिए उपयोगी हो सकते हैं और यदि शरीर प्रत्यारोपण के लिए उपयोगी न हो तो मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों की पढ़ाई में उसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

इसे भी पढ़ें: बधाई से मिले पैसों से शिवरात्रि पर कोटा में किन्नर ने स्थापित करवाया शिवलिंग, कहा- 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन के बाद लिया था संकल्प

12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा :-

- 27 अप्रैल 2026 को जयपुर से शुरू हुई यात्रा

- अब आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तक पहुंची

- 3500 किमी पैदल सफर पूरा

- करीब 11,000 किमी पैदल यात्रा का लक्ष्य

ज्योतिर्लिंग यात्रा में देहदान का संदेश :-

- यात्रा से पहले चंद्रकांत चौहान ने किया देहदान का संकल्प

- SMS मेडिकल कॉलेज में स्वैच्छिक सहमति पत्र जमा

- गांवों तक पहुंचकर समझ रहे भारत

- स्थानीय लोगों, संस्कृति और खान-पान से जुड़ रहे

अब तक दर्शन :-

- केदारनाथ

- काशी विश्वनाथ

- बैद्यनाथ

- अगला पड़ाव मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें